बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन की बढ़ीं मुश्किलें, मानवता के खिलाफ अपराध की जांच के लिए ICT में शिकायत दर्ज

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Dhaka News: बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती दिख रही हैं। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) में उनके खिलाफ ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ की जांच कराने की मांग को लेकर दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। ये शिकायतें बांग्लादेश आजाद पार्टी और राष्ट्रसंलाप फोरम की तरफ से दाखिल की गई हैं।

छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा और संवैधानिक पद की भूमिका पर सवाल

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित हिंसा में शाहाबुद्दीन की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। तत्कालीन सरकार में सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रहते हुए हिंसा, अत्याचार और मानवाधिकार उल्लंघनों को रोकने में असफल रहने के कारण उनकी भूमिका की विस्तृत जांच की मांग की गई है । इसी घटनाक्रम से जुड़े मामलों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पहले ही अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है ।

सरकार का रुख: सुरक्षा जारी रहेगी, गिरफ्तारी का फिलहाल ठोस आधार नहीं

दूसरी ओर, बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति की तुरंत गिरफ्तारी की संभावना से साफ इनकार कर दिया है। गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने स्पष्ट किया कि सरकार के पास उन्हें गिरफ्तार करने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। उनके अनुसार राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने केवल अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का पालन किया था। इसके साथ ही उन्हें स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF) और प्रेसिडेंशियल गार्ड रेजिमेंट की सुरक्षा पूर्ववत मिलती रहेगी ।

कानून मंत्री मोहम्मद असदुज्जमान ने संकेत दिया है कि पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की भी गहन जांच की जा सकती है। वहीं ट्रिब्यूनल के मुख्य अभियोजक एमडी अमीनुल इस्लाम ने दोनों शिकायतों की पुष्टि करते हुए कहा कि प्राथमिक अध्ययन के बाद ही आगे का कानूनी रास्ता तय होगा। ऐसे में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही कोई औपचारिक आरोप तय या कार्रवाई की जा सकेगी।

Desh Raj
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