Dhaka News: बांग्लादेश के सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए ‘मक्का रक्षा समझौते’ में शामिल होने की खबरों से दक्षिण एशिया में रणनीतिक हलचल बढ़ गई है. विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर के हवाले से आई इन रिपोर्ट्स के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव का एक नया अध्याय जुड़ता दिख रहा है.
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के करीबी हुमायूं कबीर ने कथित तौर पर कहा कि उनका देश सऊदी, पाकिस्तान और तुर्की से जुड़े किसी भी आर्थिक या रक्षा ढांचे में शामिल होने के लिए सकारात्मक रुख रखता है. हालांकि, भारत का विदेश मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहा है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मक्का समझौते की शर्तों के तहत किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. बांग्लादेश के जुड़ने से ढाका में पाकिस्तान का सैन्य प्रभाव बढ़ने की आशंका है.
पूर्व विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने एक बयान में कहा कि सामूहिक रक्षा ढांचे में शामिल होने से बांग्लादेश को फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है. इससे देश ऐसे युद्धों में घिसट सकता है जो उसके राष्ट्रीय हितों में नहीं हैं. उन्होंने भारत के साथ मजबूत और स्थिर संबंधों को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया.
विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश की आर्थिक सुरक्षा के लिए भारत के साथ बेहतर रिश्ते जरूरी हैं. बिजली, खाद्य सामग्री और रिफाइंड पेट्रोलियम जैसे आयात के लिए बांग्लादेश काफी हद तक भारत पर निर्भर है. इसके बावजूद नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान भारत दौरे के निमंत्रण पर पिछले छह महीनों से टालमटोल का रवैया अपना रहे हैं.
भारत ने ढाका को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र के लिए आमंत्रित किया है. हालांकि, बांग्लादेश की ओर से इस दौरे पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. विश्लेषकों का कहना है कि भारत को अपनी ‘पड़ोसी पहले’ नीति में व्यावहारिक बदलाव करने की आवश्यकता है.