New Delhi News: 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बड़ा ऐलान किया। उन्होंने सदस्य देशों के लिए एआई ओपन-सोर्स कम्युनिटी स्थापित करने की पेशकश की है। जहां अमेरिकी नीतियां सख्त हो रही हैं, वहीं चीन ने ओपन-सोर्स तकनीक से वैश्विक प्रभाव बढ़ाने का दांव चला है।
ब्रिक्स देशों के लिए ओपन-सोर्स कम्युनिटी बनाने की पहल
राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि चीन ब्रिक्स देशों के बीच बड़े भाषा मॉडल यानी एलएलएम के विकास में सहयोग बढ़ाएगा। इसके साथ ही तकनीकी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पिछले दो वर्षों में चीन ने डीपसीक और क्वेन जैसे मॉडल दुनिया भर के लिए खोलकर अपनी तकनीकी पहुंच काफी मजबूत की है।
सम्मेलन में जारी नई दिल्ली घोषणा पत्र में सुरक्षित और समावेशी एआई का समर्थन किया गया है। हालांकि चीन के इस विशेष प्रस्ताव पर भारत का रुख देखना बाकी होगा। सीमा विवाद और रणनीतिक चिंताओं के कारण भारत चीनी प्रौद्योगिकी कंपनियों को लेकर पहले से ही बेहद सतर्क और सीमित दृष्टिकोण अपनाता रहा है।
विशेष आर्थिक क्षेत्र और डिजिटल क्लाउड प्लेटफॉर्म का नया प्रस्ताव
शी चिनफिंग ने एआई के अलावा व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी का सुझाव दिया। इसके तहत सभी सदस्य देश मिलकर समन्वित विनिर्माण नीतियां बनाएंगे। इसके साथ ही ब्रिक्स डिजिटल क्लाउड प्लेटफॉर्म के जरिए सदस्य देशों के उद्योगों को जोड़ने और डिजिटल कौशल को बढ़ावा देने की योजना है।
चीन ने आधुनिक विनिर्माण क्षेत्र में स्मार्ट फैक्ट्रियां लगाने और तकनीकी मानक तय करने में सहयोग का वादा किया है। इसके अलावा सदस्य देशों के इंजीनियरों के संयुक्त विकास के लिए विशेष गठबंधन बनेगा। चीन इस बहुपक्षीय मंच के जरिए पश्चिमी एकाधिकार को तोड़कर वैश्विक तकनीक का नया केंद्र बनना चाहता है।