अनधिकृत कार्ड ट्रांजेक्शन होने पर तुरंत करें ये जरूरी काम, जानें पैसे वापसी के नियम

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New Delhi News: बिना खरीदारी किए कार्ड से भुगतान का संदेश आने पर तुरंत कार्ड ब्लॉक करना सबसे जरूरी कदम है। इसके बाद साइबर हेल्पलाइन 1930 और बैंक में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। आरबीआई के नियमानुसार, अनधिकृत लेनदेन की जानकारी 3 दिनों के भीतर बैंक को देने पर ग्राहक की कोई देनदारी नहीं बनती है।

मोबाइल पर बिना किसी खरीदारी के कार्ड से ऑनलाइन भुगतान का संदेश आने पर घबराने के बजाय तत्काल कदम उठाना जरूरी है। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं। जितनी जल्दी कार्ड को ब्लॉक कर शिकायत दर्ज की जाएगी, पैसों के नुकसान से बचने और रकम वापस मिलने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। अक्सर लोग पैसे वापस पाने के फेर में कार्ड को खुला छोड़ देते हैं, जिसका फायदा उठाकर जालसाज दोबारा लेनदेन कर सकते हैं।

सबसे पहले कार्ड को ऐसे करें ब्लॉक

धोखाधड़ी का संदेश मिलते ही सबसे पहला काम कार्ड को तुरंत ब्लॉक करना है। कार्ड ब्लॉक करने का सबसे तेज माध्यम संबंधित बैंक का मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग पोर्टल है, जहां कार्ड मैनेजमेंट विकल्प में जाकर इसे तुरंत बंद किया जा सकता है। ऐप या इंटरनेट की सुविधा न होने पर बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करें। इसके अलावा नजदीकी बैंक शाखा में जाकर भी लिखित आवेदन देकर कार्ड ब्लॉक कराया जा सकता है।

कार्ड ब्लॉक होते ही उससे किसी भी तरह का नया लेनदेन रुक जाता है। ब्लॉक करने की तारीख, सटीक समय और बैंक से मिलने वाला कंप्लेंट या रेफरेंस नंबर सुरक्षित नोट कर लें। ध्यान रखें कि बैंक कभी भी फोन, ईमेल या मैसेज पर ओटीपी (OTP), सीवीवी (CVV), पिन या पासवर्ड नहीं मांगता। बैंक अधिकारी बनकर संवेदनशील वित्तीय जानकारी मांगने वाले को विवरण कतई न दें।

साइबर हेल्पलाइन 1930 और बैंक में दर्ज कराएं शिकायत

कार्ड ब्लॉक करने के तुरंत बाद राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके सूचना दर्ज कराएं। यह हेल्पलाइन 24 घंटे सक्रिय रहती है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। साथ ही अपने बैंक में भी अनधिकृत लेनदेन की विस्तृत शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत के साथ लेनदेन की तारीख, समय, काटी गई रकम और मोबाइल पर आए अलर्ट संदेश का स्क्रीनशॉट जरूर संलग्न करें।

यदि धोखाधड़ी की रकम बड़ी है, तो नजदीकी थाने या साइबर सेल में लिखित शिकायत दर्ज कराएं और उसकी पावती (रसीद) संभालकर रखें। बैंक कई बार जांच प्रक्रिया के लिए पुलिस शिकायत की प्रति मांगते हैं। शिकायत दर्ज कराते समय केवल सटीक और प्रामाणिक तथ्य ही साझा करें, ताकि जांच में रुकावट न आए।

क्या है रकम वापसी की प्रक्रिया और आरबीआई के नियम

पैसे की वापसी काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आपने घटना की सूचना कितनी जल्दी दी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सीमित देनदारी नियमों के तहत यदि ग्राहक अनधिकृत लेनदेन की सूचना 3 कार्य दिवसों के भीतर बैंक को देता है, तो नुकसान के लिए ग्राहक पर कोई वित्तीय देनदारी नहीं होती। 4 से 7 दिनों के भीतर सूचना देने पर ग्राहक की देनदारी सीमित रहती है।

पात्र मामलों में नियमों के अनुसार बैंक को 10 कार्य दिवसों के भीतर संबंधित राशि ग्राहक के खाते में क्रेडिट करनी होती है। जांच के दौरान बैंक द्वारा मांगे गए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराते रहें और संदर्भ संख्या के आधार पर नियमित फॉलो-अप लें। यदि बैंक 30 दिनों के भीतर शिकायत का समाधान नहीं करता है, तो ग्राहक आरबीआई के एकीकृत लोकपाल (हेल्पलाइन 14448) से संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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