Ayodhya News: राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच इस्तीफा देने वाले पूर्व जनरल सेक्रेटरी चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा अयोध्या में फिर से सक्रिय हो गए हैं। यूपी सरकार की एसआईटी द्वारा अपनी फाइनल रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपे जाने के बाद दोनों नेता लगातार संतों से मिलकर बातचीत कर रहे हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि जांच रिपोर्ट ट्रस्ट को मिल चुकी है, लेकिन इसके विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। चंपत राय ने पहले ही कहा था कि वे जांच पूरी होने के बाद अपनी बात रखेंगे। हालांकि ट्रस्ट सदस्य राजकुमार दास ने पूरी न्यायिक प्रक्रिया समाप्त होने तक कोई भी राय बनाने से बचने की सलाह दी है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही दूसरी जांच
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित दूसरी एसआईटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत में सीलबंद लिफाफे में पेश करेगी। राजकुमार दास और कई वीएचपी नेताओं का मानना है कि जब तक अदालत में जांच रिपोर्ट दाखिल नहीं होती, तब तक कोई भी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। चंपत राय इस समय वीएचपी के वाइस प्रेसिडेंट भी हैं।
जून माह में डोनेशन में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद यूपी सरकार ने पहली एसआईटी बनाई थी। इस शुरुआती जांच में राय और मिश्रा को सीधे तौर पर आरोपी नहीं माना गया था। जांच के आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज हुई थी, जिसके बाद चढ़ावे की गिनती में शामिल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
अयोध्या के संतों ने किया चंपत राय का समर्थन
हाल के दिनों में अनिल मिश्रा ने इन सभी आरोपों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक बड़ी साजिश करार दिया है। वहीं अयोध्या के तपस्वी छावनी मंदिर पहुंचे चंपत राय को कई प्रमुख संतों का खुला समर्थन मिला है। पुजारी परमहंस आचार्य ने दावा किया कि चंपत राय पूरी तरह निर्दोष हैं।
अयोध्या के मेयर गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि ट्रस्ट की सिफारिश पर ही पूरी जांच शुरू हुई थी और रिपोर्ट आने के बाद पूरा सच सामने आ जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी दोषी होगा, उसे सख्त सजा मिलेगी। इससे पहले जुलाई में चंपत राय ने एक पत्र लिखकर अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया था।