गुवाहाटी हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना जानकारी महिला को बांग्लादेश भेजने पर असम सरकार को मुआवजा देने का आदेश

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Guwahati News: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम सरकार को एक पीड़िता के पति को दो लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का सख्त निर्देश दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि विदेशी घोषित लोगों को हिरासत में लेने से पहले ट्रिब्यूनल के आदेश की निःशुल्क प्रति दी जाए। यह आदेश 3 सितंबर 2026 को जारी किया गया।

चुनौती देने का मौका दिए बिना बांग्लादेश भेजने पर नाराजगी

जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस सुष्मिता फुकन खाउंड की खंडपीठ ने कहा कि महिला को हिरासत से पहले ट्रिब्यूनल के नए फैसले की जानकारी मिलनी जरूरी थी। उच्च न्यायालय में आदेश को चुनौती देना उसका कानूनी अधिकार था। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को मुमताज बेगम का पता लगाकर उन्हें तुरंत भारत वापस लाने का निर्देश दिया है।

अदालत ने पाया कि ऐसा कोई दस्तावेजी रिकॉर्ड नहीं है जिससे साबित हो कि महिला या उसके परिजनों को गिरफ्तारी का कारण बताया गया था। ट्रिब्यूनल का आदेश समय पर न मिलने और महिला को एक हिरासत केंद्र से दूसरे केंद्र स्थानांतरित किए जाने के कारण उसे फैसले को कानूनी रूप से चुनौती देने का कोई अवसर नहीं मिल सका।

ट्रिब्यूनल के कामकाज और अनावश्यक देरी पर उठाए सवाल

हाई कोर्ट ने 2 जून को सर्टिफाइड कॉपी के आवेदन के बावजूद 5 जून को आदेश देने पर ट्रिब्यूनल के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए। 30 मई 2026 को ट्रिब्यूनल में पेशी के बाद पुलिस ने मुमताज को हिरासत में लेकर पहले जुरिया, फिर नागांव और उसके बाद मटिया तथा श्रीभूमि के होल्डिंग सेंटर भेज दिया था।

पीड़िता के पति को हिरासत की आधिकारिक सूचना तक नहीं दी गई थी। जब तक 5 जून को आदेश की प्रति मिली, तब तक महिला को स्थानांतरित किया जा चुका था। इसके बाद 13 जून को महिला को सीमा सुरक्षा बल के हवाले कर दिया गया और 14 जून 2026 की सुबह उसे चुपचाप बांग्लादेश सीमा में डिपोर्ट कर दिया गया।

Desh Raj
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