Hisar News: जिले के भेरिया गांव के होनहार मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता में इतिहास रच दिया है। उन्होंने पुरुषों के 80 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। फाइनल मुकाबले में अंकुश ने इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को शानदार खेल के दम पर हराया।
करीब 15 मिनट तक चले इस बेहद रोमांचक मुकाबले में अंकुश की पंचिंग स्पीड, सटीक तालमेल और बेहतरीन काउंटर अटैक ने जीत तय की। इस ऐतिहासिक जीत के बाद भेरिया गांव में जश्न का माहौल है। परिवार, रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां बांटकर इस कामयाबी की खुशी मनाई।
समीफाइनल में कनाडा के खिलाड़ी को दी थी करारी शिकस्त
इससे पहले अंकुश ने सेमीफाइनल मैच में कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 के एकतरफा अंतर से हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की की थी। फाइनल मुकाबले में भी उन्होंने कोच की रणनीति के मुताबिक आक्रामक खेल दिखाते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
अंकुश ने महज 11 साल की उम्र में बॉक्सिंग रिंग में कदम रखा था। छह भाई-बहनों के परिवार में पले-बढ़े अंकुश को खेलों की प्रेरणा अपने घर से ही मिली। कोच प्रदीप सावंत की सलाह पर पिता सुरेश कुमार उन्हें रोजाना करीब 15 किलोमीटर दूर बने ट्रेनिंग सेंटर ले जाया करते थे।
ताने सुने पर हार नहीं मानी, कड़ी ट्रेनिंग से पाया मुकाम
शुरुआती दिनों में लोगों ने अंकुश की उम्र और शारीरिक बनावट को लेकर ताने दिए, लेकिन परिवार ने उनका मनोबल बनाए रखा। साल 2018 में स्टेट चैंपियनशिप का फाइनल हारने के बाद वे बॉक्सिंग छोड़ना चाहते थे। तब उनके पिता और कोच ने उनका हौसला बढ़ाया और दोबारा तैयारी शुरू कराई।
इसके बाद अंकुश ने रोजाना पांच घंटे की कड़ी ट्रेनिंग की। वे फिटनेस, पंचिंग स्पीड और फुटवर्क पर खास ध्यान देते हैं। राइट स्ट्रेट और लेफ्ट हुक पंच उनकी सबसे बड़ी मजबूती हैं। कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने आखिरकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा फहराया।
अब एशियन गेम्स में पदक जीतने पर है अंकुश का अगला फोकस
बेटे की इस स्वर्णिम उपलब्धि पर मां मुकेश देवी और पिता सुरेश कुमार ने खुशी जताते हुए कहा कि अंकुश ने अपना वादा पूरा किया है। पूर्व कबड्डी खिलाड़ी रहे पिता ने ही उन्हें बॉक्सिंग चुनने की सलाह दी थी। मां ने बताया कि अंकुश की डाइट में देसी खाना ही शामिल रहता है।
कोच प्रदीप सावंत और बड़े भाई अंकित (जो खुद भी बॉक्सर हैं) ने कहा कि अंकुश का खेल पिछले एक साल में काफी निखरा है। कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीतने के बाद अब उनका मुख्य लक्ष्य आगामी एशियन गेम्स में बेहतरीन प्रदर्शन कर भारत के लिए पदक जीतना है।