Shimla News: पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। सर्वोच्च अदालत ने हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तें अधिनियम-2024 को असंवैधानिक घोषित करते हुए राज्य सरकार की एसएलपी खारिज कर दी है।
जयराम ठाकुर ने बुधवार को बयान जारी कर बताया कि न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार की याचिका खारिज की है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की पीठ ने कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता देने का आदेश दिया था।
सेवा शर्तें कानून रद्द होने पर सरकार पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद भी राज्य सरकार ने शीतकालीन सत्र में नया विधेयक पारित कराया था। भाजपा ने उस समय भी इसका विरोध करते हुए असंवैधानिक बताया था। अदालत के फैसले से साबित हुआ है कि यह कानून टिक नहीं पाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार खुद को कर्मचारी हितैषी बताती है, लेकिन उसके फैसले हमेशा कर्मचारियों के खिलाफ रहे हैं। सरकार का मुख्य मकसद अपनी वित्तीय देनदारियों को टालना था। न्यायपालिका ने सरकार के इस कदम को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
मुख्यमंत्री सुक्खू पर लगाया आरोपों की राजनीति का आरोप
जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हर असफलता का ठीकरा भाजपा पर फोड़ते हैं। उत्तर भारत के संपन्न मुख्यमंत्रियों की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री की सफाई पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह रिपोर्ट चुनावी हलफनामे के आधार पर बनी थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पारित होने का स्वागत किया है। उन्होंने इसे युवाओं के हित में ऐतिहासिक कदम बताया। ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।