Shimla News: हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने देश में बार-बार हो रहे पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नए कानून बनाने की आड़ में अपनी जवाबदेही से बच रही है, जबकि सख्त कदम उठाने के लिए जरूरी कानूनी प्रावधान पहले से मौजूद हैं।
जगत सिंह नेगी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन ने युवाओं को नई ऊर्जा दी है। उन्होंने लंबे समय तक अनशन कर मुद्दों को मजबूती से उठाया। हालांकि केंद्र सरकार ने उनके आंदोलन के मुख्य विषयों पर कोई गंभीर ध्यान नहीं दिया और सिर्फ गुमराह करने का काम किया।
पेपर लीक की घटनाओं और जांच पर उठाए गंभीर सवाल
राजस्व मंत्री ने बताया कि बीते 12 सालों में देश में 152 बार पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। इससे लाखों छात्रों का भविष्य संकट में पड़ा है और कई छात्र-छात्राओं ने परेशान होकर आत्महत्या तक की है। उन्होंने सवाल किया कि केंद्रीय जांच एजेंसियां ईडी और सीबीआई होने के बावजूद आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
नेगी ने नीट पेपर लीक का उदाहरण देते हुए कहा कि 90 दिनों में चार्जशीट दाखिल न होने से आरोपियों को जमानत मिली। इससे जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं। उन्होंने मांग की कि पेपर लीक मामलों में करोड़ों रुपये का लेन-देन होने के कारण मनी लॉन्ड्रिंग के तहत भी जांच की जानी चाहिए।
राजनीतिक इच्छाशक्ति और सख्त कार्रवाई की मांग
नेगी ने कहा कि केवल नए कानूनों की घोषणा करने से समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में इतनी बड़ी नाकामी के बाद संबंधित मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
उन्होंने युवाओं के देशव्यापी प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह आंदोलन अब विदेश में रहने वाले छात्रों तक पहुंच चुका है। सरकार को बयानबाजी छोड़कर दोषियों पर तुरंत और कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। केवल सख्त क्रियान्वयन से ही देश के लाखों युवाओं का भविष्य सुरक्षित और बेहतर बनाया जा सकता है।