Delhi News: जुलाई में जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस पर हुए प्रदर्शनों में अप्रत्याशित भीड़ जुटने के बाद दिल्ली पुलिस प्रमुख ने खुफिया तंत्र में बड़े बदलाव के निर्देश दिए हैं। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने खुफिया शाखा को हर प्रदर्शन से पहले कम से कम 10 खास जानकारियां जुटाने का आदेश दिया है।
बीती 20 जुलाई को दिल्ली की सड़कों पर हजारों युवा शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर उतर आए थे। इस दौरान संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई थी। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले इस्तेमाल करने पर काफी आलोचना हुई थी।
घटनाक्रम के बाद पुलिस कमिश्नर ने स्पेशल ब्रांच को विरोध प्रदर्शनों का आयोजन करने वाले समूहों का गहन विश्लेषण करने को कहा है। अब तक खुफिया विभाग केवल प्रदर्शन स्थल और संभावित भीड़ जैसी बुनियादी जानकारी ही एकत्र करता था। नए आदेशों के तहत अब आयोजकों की पूरी कुंडली खंगालना बेहद जरूरी कर दिया गया है।
विशेष रूप से खुफिया विभाग को इन 10 प्रमुख बिंदुओं पर डेटा इकट्ठा करने के निर्देश दिए गए हैं:
- प्रदर्शन में शामिल होने वाले प्रतिभागियों की विस्तृत प्रोफाइल।
- विभिन्न राज्यों से होने वाली लोगों की भागीदारी का आंकड़ा।
- भीड़ जुटाने और लामबंदी के लिए अपनाए गए तरीके।
- प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले नेताओं और मुख्य पदाधिकारियों के नाम।
- प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें और उनका वास्तविक एजेंडा।
- दिल्ली में उनके ठहरने और आने-जाने के स्थान।
- स्थानीय स्तर पर उनके संपर्क और उनसे जुड़े संबंध।
- प्रदर्शन आयोजित करने के लिए मिल रही फंडिंग के मुख्य स्रोत।
- प्रदर्शन में शामिल होने वाले विभिन्न संगठनों का विवरण।
- कानून-व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का अग्रिम आकलन।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि ये नए निर्देश किसी भी बड़ी जनसभा से पहले पुलिस की तैयारियों को दुरुस्त करने के लिए दिए गए हैं। खासकर जब प्रदर्शन में दिल्ली से बाहर के लोग या कई संगठन शामिल हों। जमीनी इकाइयों को केवल अनुमान लगाने के बजाय प्रमाणित और उपयोगी रिपोर्ट देने के आदेश मिले हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार केवल यह जानना काफी नहीं है कि प्रदर्शन कहां हो रहा है। इसके साथ ही यह समझना भी जरूरी है कि इसके पीछे कौन है और लोगों को कैसे जुटाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर उन्हें कोई मदद मिल रही है या नहीं, इसकी जांच भी अब की जाएगी।
कमिश्नर कुमार ने आपात स्थिति से निपटने के लिए रेडियो संचार प्रणाली को हमेशा सक्रिय रखने पर विशेष बल दिया है। समीक्षा में पाया गया था कि संचार व्यवस्था में ढिलाई के कारण जमीनी स्तर से वरिष्ठ अधिकारियों तक जानकारी देर से पहुंच रही थी। इससे मौके पर सही समय पर फैसले लेना मुश्किल हो गया था।
सूचनाओं में देरी की समस्या को दूर करने के लिए पूरे वायरलेस नेटवर्क की व्यापक जांच के निर्देश दिए गए हैं। अब गश्ती टीमों से लेकर शीर्ष अधिकारियों और पीसीआर कर्मियों को अपने वायरलेस सेट पर हमेशा उपलब्ध रहना होगा। इससे कमांड बिना किसी देरी के आगे भेजे जा सकेंगे और पुलिस का समन्वय मजबूत होगा।
जंतर-मंतर पर हुए हालिया घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस की भूमिका पर काफी सवाल उठे थे। इसके बाद पुलिसकर्मियों को नए दौर के युवाओं से निपटने के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जवानों को स्पष्ट समझाया गया है कि संवेदनशील परिस्थितियों में प्रदर्शनकारियों के साथ कैसा व्यवहार करना है और किन गलतियों से बचना है।