लोकसभा में एफसीआरए बिल पर घमासान के आसार, कांग्रेस ने सांसदों के लिए जारी किया तीन लाइन का कड़ा व्हिप

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Delhi News: संसद में एफसीआरए संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को तीन लाइन का व्हिप जारी कर अपने सभी लोकसभा सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

संसदीय गलियारों में चर्चा है कि विपक्षी दल इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सरकार को घेरने की बड़ी रणनीति बना रहे हैं। आगामी 10 अगस्त को लोकसभा में बहुचर्चित एफसीआरए संशोधन बिल पेश होने की संभावना है। यह बिल गृह मंत्रालय से जुड़ा होने के कारण गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी तय मानी जा रही है।

शुक्रवार सुबह राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दफ्तर में विपक्ष के बड़े नेताओं की एक बैठक हुई। इस बैठक में कांग्रेस नेतृत्व ने अपने सभी सहयोगी दलों को सोमवार से सांसदों की शत-प्रतिशत मौजूदगी सुनिश्चित करने की सलाह दी है। मॉनसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा है।

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा, “हम आने वाले हफ्ते में परिसीमन और FCRA बिल पर चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। हमें अच्छी तरह पता है कि अमित शाह पिछले 12 दिनों से सदन से गायब चल रहे हैं। अब वे देश भर में चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शनों और अन्य मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की पूरी कोशिश करेंगे।”

विपक्षी गठबंधन के अन्य दल भी इस मामले में एकजुट हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस साझा रणनीति का समर्थन करती है। उन्होंने कहा, “हम हर कदम पर विपक्ष के साथ खड़े हैं और आगे भी डटे रहेंगे। यदि जरूरत पड़ी तो हम भी अपनी तरफ से आधिकारिक व्हिप जारी कर देंगे, हालांकि हमारे सभी सांसद पहले से ही सदन में मौजूद हैं।”

तृणमूल कांग्रेस ने भी अपने सभी सांसदों को सोमवार से सदन में मौजूद रहने की सख्त हिदायत दी है। दूसरी तरफ इस विधेयक के प्रावधानों को लेकर ईसाई संगठनों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि रद्द हुए रजिस्ट्रेशन वाली संस्थाओं की संपत्ति पर सरकार को अधिकार मिलने का नियम नुकसान पहुंचा सकता है।

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर ज्ञापन सौंपा था। मुख्यमंत्री के अनुसार गृह मंत्री ने भरोसा दिया है कि 12 अगस्त को आने वाले इस बिल में कोई भी पुराना प्रभाव डालने वाला नियम शामिल नहीं होगा। संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हो रहा है और इसे आगे बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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