New Delhi News: पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर के नेतृत्व वाली कोयला, खान और इस्पात संबंधी संसदीय स्थायी समिति को वर्ष 2026 का संसद रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया है। नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 16वें समारोह में मूल रिपोर्टों की बेहतरीन प्रस्तुति के लिए यह सम्मान मिला।
संसद के दोनों सदनों की चुनिंदा चार स्थायी समितियों में अनुराग ठाकुर की समिति को प्रभावी निगरानी कार्य के लिए चुना गया। सम्मान ग्रहण करते हुए उन्होंने जूरी और प्राइम पॉइंट फाउंडेशन का धन्यवाद किया। उन्होंने इस सफलता का श्रेय समिति के सभी सदस्यों, शोधकर्ताओं और सचिवालय कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों और कड़े परिश्रम को दिया।
समिति ने पेश कीं 29 महत्वपूर्ण और व्यापक रिपोर्टें
अनुराग ठाकुर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसदीय समितियां सरकारी नीतियों की गहन समीक्षा का सशक्त जरिया हैं। जून 2024 से अब तक इस समिति ने 64 बैठकें आयोजित कर कुल 29 विस्तृत रिपोर्टें संसद में रखीं। इन रिपोर्टों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा, खनिज आपूर्ति और औद्योगिक विकास से जुड़े अहम सुझाव शामिल किए गए।
समिति ने घरेलू खनिज खोज तेज करने, धुले कोयले के उत्पादन और इस्पात क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जैसे रणनीतिक विषयों पर अध्ययन किया। इसके अलावा डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन फंड और प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की। यह सभी कार्य देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों से सीधे जुड़े हैं।
राष्ट्रीय और वैश्विक मंचों पर निभा रहे महत्वपूर्ण भूमिका
सांसद अनुराग ठाकुर लोक लेखा समिति, विद्युत मंत्रालय की सलाहकार समिति और वन नेशन वन इलेक्शन की संयुक्त समिति में भी सक्रिय हैं। वे 130वें संविधान संशोधन विधेयक और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान की संयुक्त संसदीय समितियों का हिस्सा हैं। वैश्विक स्तर पर वे भारत-यूरोपीय संघ संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष के तौर पर कूटनीतिक योगदान दे रहे हैं।
अनुराग ठाकुर को वर्ष 2019 में व्यक्तिगत श्रेणी में संसद रत्न और चैंपियंस ऑफ चेंज अवॉर्ड मिल चुका है। उन्हें 2011 में सर्वश्रेष्ठ युवा सांसद और 2014 में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा यंग ग्लोबल लीडर चुना गया था। उनकी समिति को मिला यह नया राष्ट्रीय पुरस्कार हमीरपुर और पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।