Lahaul Spiti News: हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति में उदयपुर-पांगी सड़क मार्ग पर चट्टानें गिरने से एक बड़ा हादसा हो गया। वाहन में सवार 13 लोगों की जान चली गई। इस दर्दनाक हादसे ने पहाड़ों की पारिस्थितिकी और सुरक्षा को दरकिनार कर हो रहे विकास कार्यों पर दोबारा गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाने की जरूरत
पहाड़ों पर विकास कार्यों की योजना पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखकर बनाना बेहद जरूरी है। सड़कों के निर्माण के बाद संबंधित विभागों को इनकी नियमित निगरानी करनी चाहिए। संभावित जोखिमों को लेकर जनता को समय से पहले सतर्क करना चाहिए, लेकिन ऐसा न होने से बरसात में बार-बार बड़े हादसे होते रहते हैं।
इस भीषण हादसे में मारे गए लोगों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है। सरकारी रिकॉर्ड में इसे भले ही प्राकृतिक आपदा के रूप में दर्ज किया जाए, लेकिन यह पहाड़ों की प्रकृति से अनियंत्रित छेड़छाड़ का परिणाम है। विकास के नाम पर प्राकृतिक संतुलन को अनदेखा करना भारी पड़ रहा है।
भूस्खलन के बाद बिना सुरक्षा जांच मार्ग खोलने पर सवाल
बीते शुक्रवार को यह हादसा उस समय हुआ जब लोग कुल्लू से किलाड़ जा रहे थे। भूस्खलन के दो दिन बाद ही इस मार्ग को बहाल किया गया था। बिना सुरक्षा आकलन के यातायात की अनुमति देना अधिकारियों की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है, विशेषकर मानसून के दौरान यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
पहाड़ों की संरचना को समझे बिना निर्माण करना घातक साबित हो रहा है। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, अव्यवस्थित निर्माण और पेड़ों की लगातार कटाई से पहाड़ों की अंदरूनी पकड़ बेहद कमजोर हो रही है। जान-माल की सुरक्षा के लिए विकास योजनाओं के केंद्र में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना अब अनिवार्य हो गया है।