Kolkata News: कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुनवाई में स्पष्ट किया है कि मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड और पैन कार्ड भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं। अदालत ने सुमन मोल्ला की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ता ने अपने रिश्तेदार नासिर को निरुद्ध केंद्र भेजे जाने के खिलाफ याचिका लगाई थी। नासिर का नाम वर्ष 2026 की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में मतदाता सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया, जबकि नाम हटाने के खिलाफ अपील लंबित थी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने नासिर के वोटर आईडी कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक का हवाला दिया। न्यायमूर्ति देबांग्शु बसाक और न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि यह दस्तावेज केवल पहचान और निवास साबित करते हैं, नागरिकता नहीं।
अदालत ने नागरिकता साबित न होने पर याचिका खारिज की
अदालत ने कहा कि केवल बैंक खाता खुलवाना या मतदाता सूची में नाम होना भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है। पीठ के अनुसार याचिकाकर्ता और हिरासत में लिया गया व्यक्ति आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 के तहत निर्धारित नागरिकता के जरूरी प्रमाण पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहे।
गृह मंत्रालय के मई 2025 के परिपत्र के तहत नासिर को जून 2026 में हिरासत में लिया गया था। परिपत्र के मुताबिक हिरासत में लिए गए व्यक्ति को नागरिकता साबित करने के लिए 60 दिन मिलते हैं। हालांकि, तय समय सीमा तक नासिर कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को सूचित किया कि पूरी जांच और वेरिफिकेशन के बाद नासिर को बांग्लादेशी नागरिक पाया गया था। नासिर ने अपने माता-पिता की मृत्यु भारत में होने का दावा किया, लेकिन वह उनकी कब्र या स्थान की जानकारी भी नहीं दे पाया।
इमिग्रेशन कानून में नागरिकता साबित करने के नियम
इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 में नागरिकता के लिए दस्तावेजों की कोई निश्चित सूची नहीं है। इस कानून की धारा 16 के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की नागरिकता पर सवाल उठता है, तो खुद को भारतीय साबित करने की पूरी जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की होती है।
भारतीय नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज इस बात पर निर्भर करते हैं कि नागरिकता कैसे मिली है। जन्म से नागरिकता के लिए जन्म प्रमाण पत्र और माता-पिता के दस्तावेज चाहिए। वहीं रजिस्ट्रेशन या नेचुरलाइजेशन से नागरिकता हासिल करने वालों के लिए केंद्र सरकार का प्रमाण पत्र जरूरी है।
आधार कार्ड केवल पहचान और निवास का प्रमाण है, जबकि पैन कार्ड केवल टैक्स से जुड़ा दस्तावेज है। वोटर आईडी सिर्फ मतदाता सूची में नाम दर्ज होने की पुष्टि करता है। पासपोर्ट यात्रा का मुख्य जरिया है, लेकिन विदेश मंत्रालय के अनुसार यह भी अकेला कानूनी सबूत नहीं है।