Delhi News: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के प्रमुख शरद पवार अपनी नई राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चा में हैं। मंगलवार को उन्होंने जंतर-मंतर जाकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके से मुलाकात की। इसके अगले ही दिन पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
लगातार दो दिनों में हुई इन मुलाकातों ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इन मुलाकातों के पीछे केवल छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि परिसीमन बिल को लेकर शरद पवार की दूरगामी रणनीति भी हो सकती है। पवार अपनी पार्टी का भविष्य सुरक्षित करने के लिए संतुलित कदम बढ़ा रहे हैं।
दोनों पक्षों के साथ संपर्क साधने में जुटे पवार
शरद पवार की पार्टी ने परिसीमन बिल पर अभी अपना रुख साफ नहीं किया है। माना जा रहा है कि वह सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों से संपर्क बनाए रखकर आगे की स्थिति भांप रहे हैं। जंतर-मंतर पर पवार ने नीट (NEET) पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों का समर्थन किया।
इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी से हुई मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को हवा दे दी है। जून में पवार की पार्टी के कांग्रेस में विलय की खबरें आई थीं। वहीं जुलाई में उनके एनडीए (NDA) के करीब जाने की चर्चाएं चली थीं। फिलहाल उनके पास लोकसभा में 8 सांसद और महाराष्ट्र विधानसभा में 10 विधायक हैं।
संतुलन साधने में पहले भी माहिर रहे हैं शरद पवार
शरद पवार पहले भी दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाकर अपनी राजनीति करते रहे हैं। साल 2019 में उन्होंने उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के साथ मिलकर विपक्षी गठबंधन बनाने की पहल की थी। उसी समय उनके भतीजे अजित पवार बीजेपी के संपर्क में चले गए थे और देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
परिसीमन बिल पर सुप्रिया सुले ने कहा था कि शरद पवार हमेशा सही समय पर फैसला लेते हैं। अगर सरकार कुछ शर्तों के साथ परिसीमन बिल दोबारा लाती है, तो समर्थन देने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, सुप्रिया सुले ने एनडीए में शामिल होने की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया था।