New Delhi News: देश में सेमी हाई-स्पीड ट्रेनों के बढ़ते नेटवर्क के बीच भारतीय रेलवे लोको पायलटों के भत्ते की व्यवस्था बदलने की तैयारी कर रहा है। रेलवे बोर्ड किलोमीटर आधारित पुराने माइलेज भत्ते को खत्म कर ड्यूटी-कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (DCI) नाम से नया फॉर्मूला लागू करने की योजना बना रहा है।
नए मसौदे के अनुसार ड्राइवरों की कमाई सिर्फ दूरी पर तय नहीं होगी। इसके बजाए ट्रेन चलाने के दौरान मानसिक तनाव और काम की जटिलता का आंकलन किया जाएगा। जापान की तर्ज पर तय सैलरी के साथ हाई-स्पीड ‘मेंटल कंसंट्रेशन भत्ता’ देने पर विचार जारी है। इससे ड्राइवरों की कमाई घटने की आशंका है।
पुराना नियम खत्म होने से कुल कमाई पर असर
रेलवे बोर्ड का मानना है कि 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाने पर पुराना माइलेज भुगतान काफी ज्यादा बैठता है। नए फॉर्मूले से लोको पायलटों की कुल मासिक कमाई में 15 से 25 प्रतिशत तक की कटौती हो सकती है। रेलवे इसे सही आंकलन की दिशा में उठाया गया कदम बता रहा है।
दूसरी तरफ ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (AIRF) ने इसका कड़ा विरोध किया है। महासचिव शिव गोपाल मिश्रा के मुताबिक हाई-स्पीड ट्रेनों में चालकों का जोखिम और तनाव बढ़ जाता है। यूनियन ने भत्ते में कटौती को अन्याय बताया है। साथ ही खाली पड़े 20 हजार पदों को भरने और स्ट्रेस-रिस्क अलाउंस की मांग उठाई है।