New Delhi News: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कार्यशैली में बड़ा रणनीतिक बदलाव देखा जा रहा है। कभी बयानों तक सीमित रहने के आरोपों से घिरे राहुल अब आक्रामक होकर सीधे जमीन पर उतर रहे हैं। वे बिना किसी पूर्व सूचना के प्रशासनिक कार्यालयों के सामने धरने पर बैठकर मुद्दों को अंजाम तक पहुंचा रहे हैं।
छात्र मुद्दों पर सख्त रुख और डीसीपी दफ्तर पर धरना
हाल ही में छात्र आंदोलन के दौरान पेलेट गन से घायल हुए छात्र साहिल लोचब की शिकायत दर्ज कराने वे अचानक डीसीपी कार्यालय पहुंचे। पुलिस द्वारा टालमटोल करने पर वे धरने पर बैठ गए। करीब छह घंटे चले विरोध और प्रियंका गांधी के पहुंचने के बाद पुलिस को आखिरकार एफआईआर दर्ज करनी पड़ी।
इससे पहले नीट परीक्षा और पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री आवास के पास अचानक विरोध जताया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे अब केवल मुद्दा उठाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उसके समाधान तक लड़ाई जारी रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
भारत जोड़ो यात्रा और नई पीढ़ी से सीधा संवाद
साल 2022 की कन्याकुमारी से कश्मीर तक की भारत जोड़ो यात्रा ने राहुल गांधी की राजनीतिक छवि को काफी हद तक मजबूत किया है। इस यात्रा से जनता के बीच सीधा संवाद बढ़ा। वर्ष 2024 में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद से वे संसद के दोनों सदनों और बाहर लगातार काफी मुखर नजर आ रहे हैं।
राहुल गांधी अपनी नई रणनीति के तहत युवाओं और ‘जेन-जेड’ पीढ़ी को जोड़ने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। कोटा और पुणे जैसे बड़े कोचिंग केंद्रों में जाकर वे छात्रों से पेपर लीक और परीक्षाओं की समस्याएं सुन रहे हैं। साथ ही सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं।
सत्तारूढ़ दल के आरोप और गठबंधन की चुनौतियां
सत्तारूढ़ भाजपा ने राहुल गांधी के इन नए तेवरों पर पलटवार किया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि पुलिस और कानूनी प्रक्रियाओं को राजनीतिक रंग देना अराजकता की राजनीति है। वहीं, गैर-भाजपा शासित या गठबंधन राज्यों में भर्ती विवादों और छात्र आंदोलनों को लेकर कांग्रेस के सामने संतुलन बनाने की भी बड़ी चुनौती है।