Delhi News: ई20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने संसद में स्थिति स्पष्ट की है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि 2005 से 2016 के बीच बनी बीएस-3 गाड़ियों में ई20 ईंधन से रबर के कुछ पुर्जे बदलने की जरूरत हो सकती है।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सड़क परिवहन मंत्री ने कहा कि माइलेज कई अन्य कारकों पर निर्भर करता है। ऑटोमोबाइल कंपनियों और जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि केवल ई20 ईंधन के कारण ही माइलेज में बड़ा अंतर नहीं आता है।
ऑटोमोबाइल एजेंसियों की स्टडी में इंजन सुरक्षित
ई20 ईंधन के असर का पता लगाने के लिए इंडियन ऑयल, आईआईपी देहरादून, सियाम और एआरएआई ने मिलकर अध्ययन किया। अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार कार और दोपहिया वाहनों के इंजन में किसी भी तरह के बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं पाई गई है।
गडकरी ने बताया कि पुरानी गाड़ियों के प्रदर्शन में कोई खास गिरावट नहीं देखी गई। स्टार्ट होने की क्षमता, मेटल और प्लास्टिक कम्पैटिबिलिटी के मामले में गाड़ियां पूरी तरह सुरक्षित पाई गई हैं। वाहन चालकों को किसी असामान्य टूट-फूट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
वर्ष 2005 से 2016 के बीच बनी बीएस-3 गाड़ियों के मामले में केवल रबर पार्ट्स और गास्केट बदलने की आवश्यकता हो सकती है। इसे गाड़ी की नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से बदला जा सकता है। ऑटोमोबाइल कंपनियां ई20 से चलने वाली गाड़ियों पर वारंटी क्लेम भी जारी रखेंगी।
राजनीतिक बहस के बीच सरकार का स्पष्टीकरण
सरकार का यह बयान ऐसे समय आया है जब ई20 ईंधन के खिलाफ प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ई20 पेट्रोल को 2023 से पहले की गाड़ियों के लिए असुरक्षित बताया है और 1 अगस्त को संवाद आयोजित किया है।
इसके अलावा 4 अगस्त को परिवहन यूनियनों ने संसद मार्च की तैयारी की है। हालांकि सरकार ने तकनीकी रिपोर्ट का हवाला देते हुए चालकों को आश्वस्त किया है कि इस ईंधन से वाहनों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा और आम जनता को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।