Mumbai News: महाराष्ट्र सरकार ने सेहत से खिलवाड़ और मिलावटखोरी को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने एक साल के लिए नॉन-डेयरी यानी एनालॉग पनीर बनाने, बेचने और सप्लाई करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। कई जगह जांच में इस पनीर की क्वालिटी खराब पाई गई।
कम गुणवत्ता वाले एनालॉग पनीर को लोग अक्सर असली डेयरी पनीर समझकर खरीद लेते हैं। होटल और रेस्तरां भी कम कीमत की वजह से इसका इस्तेमाल बिना ग्राहकों को बताए कर रहे हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा था। यह बैन सिर्फ नकली और एनालॉग पनीर पर लागू है।
एनालॉग पनीर दूध से तैयार नहीं किया जाता है। इसे वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर, सिंथेटिक केमिकल और आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाकर बनाया जाता है। इसमें असली पनीर की तरह पोषण नहीं मिलता। जांच में कई राज्यों से लिए गए इसके नमूने क्वालिटी टेस्ट में पूरी तरह फेल रहे हैं।
मिलावटी और नकली पनीर के खिलाफ राजस्थान में पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग का सख्त अभियान जारी है। हाल ही में छापेमारी के दौरान कई जिलों से बदबूदार और नकली पनीर जब्त किया गया। इसके साथ ही गुजरात, पंजाब, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में भी अवैध पनीर कारोबार पर ऐसी ही सख्त कार्रवाई देखने को मिली है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, जहां पनीर की खपत काफी ज्यादा है। देश में होटल, रेस्तरां, कैटरिंग और फास्ट फूड इंडस्ट्री पनीर के सबसे बड़े खरीदार हैं। साल 2024 में भारत में संगठित पनीर का बाजार 640 अरब रुपये का था, जिसके साल 2030 तक बढ़कर 1,848 करोड़ रुपये होने की उम्मीद जताई गई है।
पनीर का बाजार जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही इसमें मिलावट भी बढ़ी है। एक अनुमान के मुताबिक इसमें 60 से 89 फीसदी तक सिंथेटिक और एनालॉग पनीर की अवैध मिलावट होती है। एफएसएसएआई की जांच में शहरों से लिए गए करीब 83 प्रतिशत सैंपल सुरक्षा और क्वालिटी मानकों पर खरे नहीं उतरे।
एफएसएसएआई की जांच में कई नमूने सब-स्टैंडर्ड पाए गए, तो कुछ में लेबलिंग के नियमों का सीधा उल्लंघन देखा गया। कुछ सैंपल गलत ब्रांडिंग के साथ बेचे जा रहे थे और कई मामलों में सीधी मिलावट पाई गई। जांच में सब-स्टैंडर्ड का मतलब खराब क्वालिटी, मिसब्रांडेड का मतलब गलत लेबल और अनसेफ का मतलब सेहत के लिए नुकसानदायक होना है।
कम गुणवत्ता वाला पनीर खाने से शरीर को सही पोषण नहीं मिलता है। लेकिन अगर पनीर में केमिकल या तेल की मिलावट हो, तो इससे पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग हो सकती है। लंबे समय तक इसका सेवन करने से लिवर और किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। बच्चे और बुजुर्ग इससे सबसे जल्दी बीमार पड़ते हैं।
असली और नकली पनीर की पहचान आसानी से की जा सकती है। असली पनीर मुलायम होता है और हाथ से दबाने पर हल्का दानेदार होकर टूटता है, जबकि नकली पनीर रबड़ की तरह खिंचता है। असली पनीर को गर्म करने पर वह धीरे-धीरे नरम होता है, जबकि मिलावटी पनीर से तेल छूटने लगता है और उसमें दूध का स्वाद नहीं मिलता।
मिलावटी पनीर से आम जनता को बचाने के लिए सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग फैक्ट्रियों पर छापेमारी कर सैंपल की जांच कराता है। नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए जा रहे हैं और भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई की जा रही है। महाराष्ट्र का ताजा बैन इसी दिशा में उठाया गया सख्त कदम है।
नियमों के तहत बना और सही लेबल के साथ बेचा जाने वाला नॉन-डेयरी पनीर खराब नहीं माना जाता। असली समस्या तब शुरू होती है, जब घटिया क्वालिटी के उत्पाद को असली दूध का पनीर बताकर ग्राहकों को धोखा दिया जाता है। देश में बढ़ती मांग के कारण नकली पनीर और गलत ब्रांडिंग की समस्या अब काफी बड़ी चुनौती बन गई है।