लखनऊ: कोर्ट परिसर के बाद ऐशबाग में वकीलों का उपद्रव, हाई कोर्ट हुआ सख्त, अधिकारियों को किया तलब

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Lucknow News: कैसरबाग स्थित जिला कोर्ट परिसर में वकीलों द्वारा मारपीट के बाद ऐशबाग में वकीलों के उपद्रव का एक और मामला सामने आया है। विवादित परिसर में वकीलों के दुस्साहस और मौके पर मौजूद पुलिस की मूकदर्शक भूमिका देखकर हाई कोर्ट बेहद हैरान नजर आया।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता सक्षम सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जेसीपी (कानून-व्यवस्था), डीसीपी सेंट्रल और एसीपी कैसरबाग को व्यक्तिगत रूप से और पुलिस कमिश्नर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

वायरल वीडियो में दिखी गुंडागर्दी, पुलिस बल की मौजूदगी पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने लाया गया कि घटना में शामिल वकील सौरभ कुमार वर्मा वही आरोपी है, जिस पर 21 जुलाई को जिला अदालत में वादकारी और वकीलों से मारपीट के आरोप हैं। सौरभ सेंट्रल बार का कनिष्ठ उपाध्यक्ष है और दूसरा आरोपी हर्षित दीक्षित महासचिव का भाई है।

आरोप है कि वकीलों का समूह दयानंद सेवा संस्थान स्थित परिसर में जबरन घुसा, जहां उन्होंने कर्मचारियों संग मारपीट की और सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए। मनोरमा मिश्रा की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। एसीपी द्वारा सौंपी गई पेन ड्राइव देखकर कोर्ट ने पुलिस की निष्क्रियता पर कड़े सवाल उठाए हैं।

चार घंटे तक चलता रहा उपद्रव, कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर जताई चिंता

अदालत ने पूछा कि सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चली इस घटना के दौरान पुलिस मूकदर्शक क्यों बनी रही। अतिरिक्त पुलिस बल क्यों नहीं बुलाया गया और उपद्रवियों को मौके से गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। एसीपी के पहुंचने से पहले चार घंटे तक कोई कार्रवाई न होना अत्यंत चिंताजनक है।

सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने पीठ को अवगत कराया कि शहर में वकीलों के कुछ समूह विवादित संपत्तियों पर नजर रखते हैं। ये लोग कानून को ताक पर रखकर गैर-कानूनी तरीके से ऐसे विवादों को जबरन सुलझाने का काम करते हैं, जिससे शहर में स्थिति भयावह होती जा रही है।

वादकारी व दिल्ली के वकीलों से मारपीट मामले में आदेश सुरक्षित

हाई कोर्ट ने 21 जुलाई को जिला कोर्ट की आठवीं मंजिल पर वादकारी और दिल्ली से आए वकीलों के साथ हुई मारपीट का स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। इस मामले में जनपद न्यायाधीश और पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट तथा सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया गया है।

सुनवाई के दौरान सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल, महासचिव अवनीश दीक्षित और वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद रहे। आरोपी वकील की ओर से वकालतनामा दाखिल किया गया, जबकि सुनवाई में डिप्टी सॉलिसिटर जनरल और सीबीआई के वकील भी कोर्ट में उपस्थित रहे।

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