Sambalpur News: नीट पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। ओडिशा के संबलपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की नई पीढ़ी के संकल्प और सपनों के सामने उनके मंत्री पद की जिम्मेदारियां बहुत छोटी हैं।
अपने संसदीय क्षेत्र में दिए इस भाषण के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने साफ किया कि उनके लिए देशहित से बढ़कर कुछ भी नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के युवाओं की सोच और नई पीढ़ी के संकल्प की हकीकत समझाने का प्रयास किया था, जिसके बाद प्रधानमंत्री ने स्वयं सीधे Gen Z से संवाद स्थापित किया।
ओडिशा की महान परंपरा का जिक्र और युवाओं की शक्ति पर भरोसा
पूर्व मंत्री ने अपने संबोधन में ओडिशा की महान विभूतियों को याद करते हुए कहा कि वे उस पवित्र भूमि से आते हैं जहां भीमभोई, उत्कलमणि गोपबंधु दास और गंगाधर मेहर जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया। उन्होंने कहा कि युवाओं के बड़े संकल्पों के आगे उनका पद मायने नहीं रखता और नई पीढ़ी की आकांक्षाओं को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
धर्मेंद्र प्रधान ने Gen Z की भूमिका को बेहद अहम बताते हुए कहा कि देश में लगभग 20 करोड़ युवा ऐसे हैं, जिनके मजबूत कंधों पर भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने इस जनरेशन जी को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सरकार युवाओं की हर उम्मीद को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
युवाओं के ऐतिहासिक बलिदान और राजनीतिक घटनाक्रम का संदर्भ
भाषण के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने स्वतंत्रता सेनानी वीर सुरेंद्र साईं के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास हमेशा से गवाह रहा है कि युवाओं ने ही हर बड़े बदलाव का नेतृत्व किया है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी देश के विकास और प्रगति के लिए हमेशा से अपने सर्वस्व का योगदान देती आई है।
बता दें कि नीट परीक्षा और कथित पेपर लीक धांधली को लेकर देशभर में भारी बवाल मचा हुआ था। विपक्ष के तीखे हमलों और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच राजनीतिक दबाव बढ़ने पर धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उसी घटनाक्रम के हफ्तों बाद अब उनका यह पहला सार्वजनिक बयान सामने आया है।