धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जश्न, लेकिन आंदोलन को दिशा देने वाले सोनम वांगचुक के जिक्र पर उठे सवाल

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Delhi News: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने जश्न मनाया। आंदोलनकारियों ने इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। हालांकि, इस पूरे कार्यक्रम के दौरान आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले सोनम वांगचुक का नाम न लिए जाने से चर्चा शुरू हो गई है।

अभिजीत दिपके ने व्यक्तिपूजा से बचने की अपील की

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत दिपके ने किसी एक व्यक्ति को हीरो बनाने से मना किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की ताकत ही सबसे बड़ी होती है। उन्होंने लोगों से व्यक्तिपूजा से बचने का आग्रह किया और कहा कि निडर होकर सत्ता से सवाल पूछे जा सकते हैं।

26 दिन के अनशन से मिली थी आंदोलन को गति

सोनम वांगचुक ने नीट पेपर लीक के खिलाफ 26 दिनों तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की थी। उनके इस कदम ने पूरे देश का ध्यान इस ओर खींचा था। तबीयत बिगड़ने के बावजूद उन्होंने अस्पताल से अपना विरोध जारी रखा। केंद्रीय मंत्रियों के आश्वासन के बाद ही उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया था।

क्रेडिट को लेकर आंदोलन के भीतर शुरू हुई चर्चा

इस्तीफे के बाद आयोजित विजय समारोह में वांगचुक का नाम गायब रहने से सवाल खड़े हो गए हैं। कई लोगों का मानना है कि जनआंदोलन में हर व्यक्ति के संघर्ष का सम्मान होना चाहिए। हालांकि, अब प्रदर्शनकारी शिक्षा सुधार और पेपर लीक के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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