चक्रवात ‘अर्णव’ को लेकर ओडिशा में बिजली विभाग अलर्ट, अस्पतालों और आश्रय स्थलों को मिलेगी प्राथमिकता

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Bhubaneswar News: चक्रवात ‘अर्णव’ के संभावित खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने तटीय और दक्षिणी जिलों में बिजली आपूर्ति सुरक्षित रखने की तैयारियां तेज कर दी हैं। उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव ने उच्चस्तरीय बैठक में तैयारियों की समीक्षा की और वे स्वयं कोरापुट से राहत कार्यों की निगरानी करेंगे। प्रशासन ने अस्पतालों और राहत शिविरों में निर्बाध बिजली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

संभावित चक्रवाती तूफान ‘अर्णव’ के प्रभाव को देखते हुए ओडिशा सरकार ने राज्य के दक्षिणी और तटीय इलाकों में बिजली के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और त्वरित बहाली के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। सोमवार को उपमुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री कनक वर्धन सिंहदेव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में 26 से 29 अक्टूबर के बीच संभावित मौसमी असर से निपटने, पावर ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और आपूर्ति में होने वाले व्यवधान को कम से कम समय में ठीक करने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव जमीनी स्तर पर राहत और बचाव कार्यों की कमान संभालने के लिए खुद कोरापुट में मौजूद रहेंगे। वहां से वे दक्षिणी ओडिशा के जिलों में बिजली व्यवस्था और आपातकालीन अभियानों की निगरानी करेंगे। राज्य सरकार ने अपनी तैयारियों में जनहानि को पूरी तरह रोकने और जरूरी सेवाओं को लगातार चालू रखने को शीर्ष प्राथमिकता दी है।

24 घंटे काम करेंगे 11 रणनीतिक नियंत्रण कक्ष

चक्रवात के दौरान और उसके बाद बिजली आपूर्ति की निगरानी के लिए ओडिशा पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (ओपीटीसीएल) ने बहुस्तरीय नियंत्रण प्रणाली स्थापित की है। चंदका स्थित एसटीएएमसी में केंद्रीय नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे सक्रिय रहेगा। इसके साथ ही नरेंद्रपुर में क्षेत्रीय निगरानी तंत्र के अलावा 11 संवेदनशील इलाकों में रणनीतिक नियंत्रण केंद्र बनाए गए हैं।

ये नियंत्रण केंद्र नरेंद्रपुर, छत्रपुर, भंजनगर, जयनगर, मालकानगिरि, थेरुवाली, केसिंगा, समनगड़ा, पारादीप, भद्रक और बालेश्वर में स्थापित किए गए हैं। इन सभी केंद्रों पर तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती, वायरलेस व सैटेलाइट संचार, वैकल्पिक डीजल जनरेटर और बैकअप डीसी बिजली आपूर्ति का पुख्ता प्रबंध किया गया है।

खंभे, तार और इमरजेंसी टावरों का अग्रिम भंडारण

तूफान के कारण ट्रांसमिशन टावरों और बिजली लाइनों को पहुंचने वाले नुकसान से फौरी तौर पर निपटने के लिए सामग्री पहले ही संवेदनशील क्षेत्रों के डिपो में पहुंचा दी गई है। इसके तहत 132, 220 और 400 केवी क्षमता वाले 83 इमरजेंसी रेस्टोरेशन सिस्टम (ईआरएस) टावर सेट, 1,115 किलोमीटर बिजली के तार और 9,157 हार्डवेयर फिटिंग सेट रिजर्व रखे गए हैं।

मौसम की स्थिति अनुकूल होते ही तकनीकी टीमें तुरंत फील्ड में उतरकर मरम्मत का कार्य शुरू करेंगी, ताकि कम से कम समय में प्रभावित इलाकों की आपूर्ति बहाल की जा सके।

अस्पतालों और राहत शिविरों को मिलेगी प्राथमिकता

ऊर्जा विभाग के निर्देशों के अनुसार, बहाली प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, पेयजल आपूर्ति स्टेशनों और चक्रवात आश्रय स्थलों को बिजली दी जाएगी, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं और राहत कार्यों में रुकावट न आए।

इसके अतिरिक्त, उपभोक्ताओं को बिजली बहाली के संभावित समय की सूचना ऑटोमेटेड एसएमएस के जरिए भेजी जाएगी, जिससे आम जनता को भ्रम की स्थिति से बचाया जा सके।

आपातकालीन स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

दक्षिण ओडिशा में आपातकालीन समन्वय के लिए टीपीएसओडीएल ने बेरहामपुर के अंबागड़ा में चौबीसों घंटे संचालित होने वाला आपात नियंत्रण केंद्र स्थापित किया है। किसी भी समस्या या आपात स्थिति के लिए उपभोक्ता निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

  • केंद्रीय आपात नियंत्रण केंद्र, ब्रह्मपुर: 9124293314
  • टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1912 / 18002026

समीक्षा बैठक में ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विशाल कुमार देव, ओपीटीसीएल, टाटा पावर और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मौसम पर नजर रखते हुए फील्ड टीमों को पूरी मुस्तैदी से सक्रिय रखें।

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