New Delhi News: भारत में इसी साल 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान शामिल होंगे।
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों की संभावनाएं भी बन रही हैं। यह महत्वपूर्ण बैठक मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और ईरान तथा संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के बीच उत्पन्न तीखे मतभेदों के बीच आयोजित हो रही है।
अक्टूबर 2019 के बाद शी जिनपिंग का पहला भारत दौरा संभव
यदि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आते हैं तो अक्टूबर 2019 में मामल्लापुरम दौरे के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। साल 2020 में लद्दाख सेक्टर में एलएसी पर हुए सैन्य तनाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी।
अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में सैन्य गतिरोध सुलझाने पर बनी सहमति के बाद पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों नेताओं ने तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन के दौरान भी द्विपक्षीय बातचीत कर संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए थे।
पाँच साल के अंतराल के बाद भारत में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन का विषय ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रखा गया है। सम्मेलन में ईरान और यूएई के बीच के मतभेद हावी रहने के आसार हैं।
पश्चिम एशिया संकट और मध्यस्थ के रूप में भारत की भूमिका
ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान की मौजूदगी से पीएम मोदी को पश्चिम एशिया संकट की विस्तृत जानकारी मिलेगी और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरानी तेल की खरीद बंद होने और चाबहार बंदरगाह के मुद्दे पर रिश्तों में कुछ गतिरोध आया था।
अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों के बाद ईरान और यूएई आमने-सामने हैं। ऐसे में भारत को दोनों देशों के बीच मतभेद कम करने में मध्यस्थ की भूमिका निभानी होगी। भारत ने इस सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया है।