Lifestyle News: आज नेल पॉलिश और नेल आर्ट महिलाओं के फैशन का बेहद अहम हिस्सा बन चुके हैं। नाखूनों को खूबसूरत बनाने का यह चलन नया नहीं है, बल्कि इसका इतिहास हजारों साल पुराना है। प्राचीन काल में नेलपेंट्स लगाना आम शौक नहीं, बल्कि राजसी रुतबे और ताकत का प्रतीक माना जाता था।
इतिहासकारों के अनुसार नेल पॉलिश का आविष्कार करीब 3000 ईसा पूर्व चीन में हुआ था। शुरुआत में इसे अंडे की सफेदी, मोम, जिलेटिन और गुलाब या आर्किड के फूलों के अर्क से तैयार किया जाता था। इस मिश्रण से चमकीला लाल और गुलाबी रंग बनता था, जिसे शाही घरानों के पुरुष और शासक लगाते थे।
युआन राजवंश में लंबे नाखून और नेल गार्ड्स थे रईसी की पहचान
प्राचीन चीन के युआन राजवंश के दौरान नेल आर्ट तेजी से लोकप्रिय हुआ। उस दौर में कुलीन वर्ग के लोग अपने लंबे नाखूनों की सुरक्षा के लिए खास नेल गार्ड्स पहनते थे। यह इस बात का सबूत था कि उन्हें हाथों से कोई शारीरिक श्रम नहीं करना पड़ता, जो उनकी संपन्नता को दर्शाता था।
उस दौर में सामाजिक नियम इतने कड़े थे कि आम लोगों को नेल पॉलिश लगाने की इजाजत नहीं थी। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, लगभग 600 ईसा पूर्व यदि कोई साधारण या कमजोर वर्ग का व्यक्ति नेलपेंट लगाए पकड़ा जाता था, तो उसे अपनी जान गंवानी पड़ती थी और सीधे मौत की सजा दी जाती थी।
नाखूनों के रंग तय करते थे व्यक्ति की शक्ति और सामाजिक हैसियत
नाखूनों के रंगों का चयन भी व्यक्ति के सामाजिक दर्जे पर निर्भर करता था। लाल रंग को सर्वोच्च प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था। चीन के मिंग राजवंश के शासकों के साथ-साथ मिस्र की महारानी नेफर्टिटी और क्लियोपेट्रा भी अपनी शक्ति व अधिकार दर्शाने के लिए गहरे लाल रंग का इस्तेमाल करती थीं।
वहीं आम नागरिकों को केवल हल्के और फीके रंगों की नेल पॉलिश लगाने की अनुमति थी। यदि कोई व्यक्ति नियमों के खिलाफ जाकर गहरा रंग लगाता था, तो उस पर भारी जुर्म माना जाता था। इसके अलावा प्राचीन मिस्र में नाखूनों को रंगने के लिए प्राकृतिक मेहंदी के इस्तेमाल के ऐतिहासिक सबूत भी मिलते हैं।