Mandi News: हिमाचल प्रदेश के मंडी में दिवाली और करवाचौथ को लेकर बाजार सज गए हैं। विदेशी उत्पादों के बीच स्थानीय कारीगरों के मिट्टी के दीये, कलश और पूजा सामग्री परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। हालांकि, बाजारों में बैठने के लिए पर्याप्त स्थान न मिलने से छोटे कारोबारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
त्योहारी सीजन के शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बाजारों में दिवाली और करवाचौथ की रौनक देखने को मिल रही है। घरों को रोशन करने और पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए महिलाएं बाजारों में दीये, कलश, करवा और अन्य पूजा सामग्री की खरीदारी कर रही हैं। आधुनिक और विदेशी सजावटी सामान की भरमार के बीच पारंपरिक मिट्टी के उत्पाद आज भी अपनी अहमियत बनाए हुए हैं। यह कारोबार रेहड़ी-फड़ी और छोटे कारीगरों की आजीविका का मुख्य साधन बना हुआ है, जिसे पुरानी और नई दोनों पीढ़ियां मिलकर आगे बढ़ा रही हैं।
तीन दशकों से मिट्टी के बर्तनों से चल रही रोजी-रोटी
सरकाघाट के रहने वाले जीवन राम और उनकी पत्नी ईश्वरो देवी पिछले 30 वर्षों से लाल मिट्टी के दीये, कलश, आरती और घड़े तैयार कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। जीवन राम ने बताया कि वे अपने उत्पादों को शहर के चौहाटा बाजार में बेच रहे हैं। उनके पास छोटे और बड़े कलश 25 से 30 रुपये में उपलब्ध हैं, जबकि पारंपरिक मिट्टी के दीयों की कीमत 30 से 50 रुपये के बीच है। स्थानीय स्तर पर तैयार ये उत्पाद लोगों की धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़े हुए हैं।
युवा पीढ़ी भी संभाल रही है पारंपरिक कला की कमान
मंडी के इंदिरा मार्केट में पंडोह से आए 25 वर्षीय युवा भीम सिंह अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। भीम सिंह ने बताया कि पहले उनकी माताजी यह कार्य करती थीं और उनके निधन के बाद अब उन्होंने इस काम को संभाला है। उनके पास बड़ा कलश 50 रुपये, छोटा कलश 30 रुपये और छह दीयों का सेट 50 रुपये में मिल रहा है। कारीगरों का कहना है कि लोग बड़े शोरूमों की जगह स्थानीय कारीगरों और छोटे दुकानदारों से खरीदारी करें, ताकि उनकी मेहनत को संबल मिल सके।
बाजारों में जगह की कमी से कारोबारी परेशान
दीयों के साथ-साथ करवाचौथ व्रत के लिए करवा और पूजा से जुड़ी अन्य वस्तुएं भी बाजारों में उपलब्ध हैं। हालांकि, त्योहारी सीजन में सामान बेचने पहुंचे छोटे कारोबारियों को जगह के अभाव के कारण निराशा का सामना करना पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि सामान रखने और बैठने के लिए उचित जगह नहीं मिल पाती, जिससे उन्हें काफी तालमेल बिठाकर काम करना पड़ता है। इससे उनका दैनिक रोजगार और कारोबार प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि त्योहारों के दौरान उन्हें व्यवस्थित और पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया जाए।