Shimla News: हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के बढ़ते वित्तीय घाटे का असर राज्य के ग्रामीण इलाकों पर पड़ने लगा है। निगम ने घाटा घटाने के लिए पिछले तीन वर्षों में 282 बस रूट बंद कर दिए हैं। इनमें से 196 रूट दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के शामिल हैं।
रूट बंद होने से निगम की वित्तीय स्थिति में सुधार तो नहीं हुआ, लेकिन गांवों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर ग्रामीण इलाकों के लोगों की समस्याएं बढ़ गई हैं। इसके अलावा इसी अवधि में 15 अन्य रूट की बस सेवाओं में भी कटौती की गई है।
एचआरटीसी का संचित घाटा 31 मार्च 2025 तक बढ़कर 2272.24 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। सरकार के मुताबिक यात्रियों की कमी, संसाधनों का अभाव और रूट का पुनर्गठन इसके मुख्य कारण हैं। हालांकि स्थानीय लोग ग्रामीण इलाकों में बसें बंद होने से लगातार सवाल उठा रहे हैं।
निगम को वित्तीय वर्ष 2022-23 में 259.02 करोड़, 2023-24 में 152.89 करोड़ और 2024-25 में 153.21 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ। तीन वर्षों में कुल शुद्ध घाटा 565 करोड़ रुपये से अधिक रहा है। वहीं वर्ष 2025-26 की बैलेंस शीट वित्तीय वर्ष पूरा होने के बाद तैयार की जाएगी।
बंद किए गए रूटों को अब निजी बस ऑपरेटरों को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। सरकार नई योजना के तहत निजी ऑपरेटरों को बस खरीदने के लिए अनुदान दे रही है। इसके साथ ही निगम खुद 1000 नई ई-बसें खरीदेगा, जिसकी फाइल वित्तीय मंजूरी के लिए भेजी गई है।
निगम की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने 13 पॉइंट का खास प्लान बनाया है। इसमें इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देना, ईंधन की बचत, मेंटेनेंस खर्च घटाना और गैर-किराया आय बढ़ाना शामिल है। इसके अलावा रियायती यात्रा की भरपाई और डिपो के प्रदर्शन पर भी ध्यान दिया जाएगा।