Shimla News: हिमाचल प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं की कार्यप्रणाली में 10 नवंबर से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब प्रदेश में ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की प्रत्येक बैठक की कार्यवाही ऑनलाइन दर्ज की जाएगी और इसे डिजिटल रूप से प्रमाणित करना भी अनिवार्य होगा।
10 नवंबर से लागू होगी पंचायत कार्यवाही प्रबंधन प्रणाली
पंचायती राज विभाग की अधिसूचना के अनुसार, यह नई व्यवस्था आगामी 10 नवंबर, 2026 से प्रभावी होगी। इसके तहत प्रदेश की सभी प्रमुख पंचायती राज संस्थाओं—ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद—की बैठकों में होने वाली चर्चा, लिए जाने वाले फैसलों और पारित प्रस्तावों का रिकॉर्ड डिजिटल माध्यम से तैयार कर संबंधित सिस्टम पर अपलोड करना होगा। सरकार के इस फैसले को पंचायती राज व्यवस्था में डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अधिकारियों की तय की गई जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। ग्राम पंचायत की बैठकों की कार्यवाही ऑनलाइन दर्ज करने और डिजिटल रूप से प्रमाणित करने की जिम्मेदारी पंचायत सचिव की होगी। इसी तरह, पंचायत समिति स्तर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी और जिला परिषद स्तर पर जिला परिषद सचिव इस पूरी प्रक्रिया को सुनिश्चित करेंगे। संबंधित अधिकारी यह देखेंगे कि बैठकों की कार्यवाही एसओपी में निर्धारित समयसीमा के भीतर सिस्टम में दर्ज हो और उसका डिजिटल प्रमाणीकरण समय पर पूरा किया जाए।
डिजिटल रिकॉर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता
पंचायत कार्यवाही प्रबंधन प्रणाली लागू होने से पंचायतों के सभी फैसले और प्रस्ताव डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे। पारंपरिक तरीके से दस्तावेज तैयार करने और उन्हें सुरक्षित रखने के बजाय अब एक समान डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यवस्था बनेगी। इससे भविष्य में किसी भी निर्णय या कार्यवाही से संबंधित जानकारी की जरूरत पड़ने पर डिजिटल रिकॉर्ड का आसानी से उपयोग किया जा सकेगा और दस्तावेजों का रखरखाव अधिक व्यवस्थित होगा।