Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर सख्ती से अंकुश लगाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। सरकार ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को डिटेन (निरुद्ध) करने की शक्तियां अब गृह सचिव के बजाए पुलिस महानिदेशक (DGP) और एडीजीपी सीआईडी (ADGP CID) को सौंप दी हैं।
गुजरात मॉडल की तर्ज पर उठाया गया कदम
राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियम, 1988 की धारा-3 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह निर्णय लिया गया है। वर्तमान में गुजरात और एक अन्य राज्य के मॉडल का अध्ययन करने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।
इससे पहले किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को निरुद्ध करने के लिए गृह सचिव से अनुमति लेनी पड़ती थी और डिटेंशन की यह अवधि सामान्य तौर पर तीन महीने की होती थी। हालांकि, अब डीजीपी और एडीजीपी सीआईडी को नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए सीधे तौर पर डिटेनिंग अथॉरिटी के रूप में अधिकृत कर दिया गया है। सरकार का यह आदेश एक वर्ष की अवधि तक अथवा अगले आदेश जारी होने तक प्रभावी रहेगा और यह पांच अप्रैल, 2021 को जारी की गई पिछली अधिसूचना का स्थान लेगा।
क्या कहती है एनडीपीएस अधिनियम की धारा-3?
एनडीपीएस अधिनियम की धारा-3 केंद्र सरकार, राज्य सरकार और निर्धारित स्तर के विशेष रूप से अधिकृत अधिकारियों को किसी व्यक्ति को निरुद्ध करने का आदेश जारी करने की शक्ति प्रदान करती है। ऐसा तब किया जाता है जब संबंधित प्राधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि उस व्यक्ति को नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में संलिप्त होने से रोकने के लिए निरुद्ध करना आवश्यक है।
यह प्रावधान विदेशी नागरिकों पर भी लागू होता है। हालांकि, डिटेंशन की यह शक्ति सामान्य आपराधिक गिरफ्तारी से पूरी तरह अलग होती है। यदि राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी डिटेंशन का आदेश जारी करता है, तो राज्य सरकार को दस दिनों के भीतर केंद्र सरकार को इसकी पूरी रिपोर्ट भेजनी अनिवार्य होती है।