Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में पर्यावरण सुधार के लिए जल्द 1,000 इलेक्ट्रिक और 200 हाइड्रोजन बसें खरीदेगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी तैयार हो रहा है। सरकार जरूरत के हिसाब से चरणबद्ध तरीके से ही नई बसें खरीदेगी।
सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बजट में ही ई-बसों को बढ़ावा देने का फैसला लिया गया था। बिना जरूरत बड़ी संख्या में बसें खरीदना सही नहीं है। यदि सरकार 3,000 बसें खरीदती है तो करीब 7,000 करोड़ रुपए खर्च होंगे, इसलिए सिर्फ मांग के अनुसार खरीद होगी।
कंपनियों के साथ 12 साल का मेंटेनेंस अनुबंध
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बस आपूर्ति करने वाली कंपनी के साथ 12 साल का मेंटेनेंस एग्रीमेंट किया है। यदि कोई बस खराब होती है, तो उसे ठीक करने का पूरा जिम्मा कंपनी का रहेगा। इससे परिवहन निगम पर मरम्मत का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने संचालन लागत का ब्योरा देते हुए बताया कि सामान्य डीजल बस चलाने में लगभग 70 रुपए प्रति किलोमीटर खर्च आता है। वहीं दूसरी तरफ इलेक्ट्रिक बस चलाने का खर्च सिर्फ 36 रुपए प्रति किलोमीटर पड़ता है। इससे निगम को लंबी अवधि में भारी आर्थिक बचत भी हासिल होगी।
धर्मपुर और सरकाघाट डिपो की जांच करेगी टीम
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि धर्मपुर और सरकाघाट डिपो में बसों की कमी दूर करने के लिए दूसरे डिपो से डीजल बसें भेजी जाएंगी। जमीनी स्थिति देखने के लिए एचआरटीसी की उच्च स्तरीय टीम धर्मपुर जाएगी। वर्तमान में दोनों डिपो में स्वीकृत संख्या से काफी कम बसें मौजूद हैं।
मंत्री ने सदन में स्पष्ट आंकड़े रखते हुए कहा कि धर्मपुर में स्वीकृत 56 में से 47 बसें चल रही हैं, जिससे 9 रूट बंद हैं। सरकाघाट में 77 के मुकाबले सिर्फ 58 बसें उपलब्ध हैं और 17 रूट ठप पड़े हैं। सरकार जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था कर सभी रूट बहाल करेगी।
विपक्ष ने ई-बसों की उपयोगिता पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके सराज क्षेत्र में भेजी गईं इलेक्ट्रिक बसें गंतव्य तक नहीं पहुंचीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहाड़ों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को समझे बिना ई-बसों को थोपा जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर ग्रामीण जनता परेशान है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सराज क्षेत्र में 17 बस रूट बंद होने से ग्रामीणों की आवाजाही ठप हो गई है। सरकार पर्यावरण बचाने का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत में यात्रियों को बसें नहीं मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पूरी तैयारी के ई-बसें चलाना पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।