Chamba News: चंबा जिले के तीसा विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा मेले में प्रस्तुत नाटक पर हो रही कार्रवाई का राजपूत महासभा ने कड़ा विरोध किया है। महासभा ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी बताते हुए अध्यापकों और स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई न करने की मांग की है। ऐसा न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
राजपूत महासभा हिमाचल प्रदेश के प्रदेशाध्यक्ष इंजीनियर केएस जमवाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विद्यार्थियों ने नाटक के जरिए सामाजिक व्यवस्था पर विचार रखे थे। लेकिन कुछ शरारती तत्व इस मुद्दे को जातिगत रंग देकर विवाद खड़ा कर रहे हैं। इस मामले को एससी-एसटी कमीशन में ले जाना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और रचनात्मक प्रयास का समर्थन
जमवाल ने बताया कि एससी-एसटी कमीशन ने चंबा के डिप्टी कमिश्नर और एसपी से जांच रिपोर्ट मांगी है। राजपूत महासभा और मंडी के राजपूत सभा अध्यक्ष डॉक्टर अमर सिंह गुलेरिया ने राज्य सरकार से निष्पक्ष रहने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों का यह नाटक आरक्षण व्यवस्था पर जन-जागरूकता फैलाने का एक रचनात्मक प्रयास था।
राजपूत महासभा का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सांस्कृतिक माध्यमों से अपनी बात रखना संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है। कुछ लोग गैर-जरूरी तर्क देकर स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों पर दंडात्मक कार्रवाई का दबाव बना रहे हैं। यदि शिक्षकों या विद्यार्थियों पर कोई अनुचित कार्रवाई की गई, तो शैक्षणिक माहौल पूरी तरह प्रभावित होगा और महासभा उग्र आंदोलन करेगी।
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन
महासभा ने स्पष्ट किया कि सामान्य वर्ग ऐसे रचनात्मक कार्यक्रमों और बैठकों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को उठाता रहेगा। इन आयोजनों का मकसद किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं होता है। महासभा ने डिप्टी कमिश्नर के जरिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को इस संबंध में एक विस्तृत ज्ञापन भी भेजा है।