Kangra News: करवाचौथ पर्व से ठीक पहले कांगड़ा जिले के डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में रिश्तों के समर्पण की मिसाल देखने को मिली है। यहां एक पति ने अपनी बीमार पत्नी को किडनी देकर नई जिंदगी दी। वहीं, चंबा की एक बड़ी बहन ने भी छोटी बहन को किडनी दान की। दोनों सफल ट्रांसप्लांट के साथ अस्पताल में अब तक 29 किडनी ट्रांसप्लांट पूरे हो चुके हैं।
करवाचौथ पर्व से पहले कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी क्षेत्र के एक दंपती ने जीवन रक्षा और समर्पण का अनूठा उदाहरण पेश किया है। ऑटोइम्यून बीमारी से जूझ रही 58 वर्षीय पत्नी की दोनों किडनियां खराब होने पर पति ने अपनी किडनी दान कर उनकी जान बचाई। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल टांडा के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया। मरीज के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होने के बाद अब दंपती को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
पीड़ित महिला लंबे समय से टांडा अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में उपचाराधीन थीं। ऑटोइम्यून बीमारी के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली ने स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाया, जिससे उनकी किडनियों ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया था। चिकित्सकों के अनुसार ट्रांसप्लांट ही जीवन रक्षा का एकमात्र रास्ता बचा था। दंपती की बेटी, जो स्वयं एक चिकित्सक हैं, ने अपने माता-पिता की काउंसलिंग की और चिकित्सकों से समन्वय स्थापित कर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। दोनों की विस्तृत जांच के बाद विशेषज्ञों ने सफल सर्जरी की।
बड़ी बहन ने छोटी बहन को दिया जीवनदान
टांडा मेडिकल कॉलेज में नेफ्रोलॉजी और ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग ने इसी माह एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। चंबा जिले के चुराह उपमंडल स्थित लटरूंड गांव की 28 वर्षीय युवती गंभीर किडनी रोग से पीड़ित थी और डायलिसिस के सहारे जीवन बिता रही थी। गंभीर स्थिति को देखते हुए उनकी बड़ी बहन ने अपनी एक किडनी दान करने का फैसला लिया। सोमवार को यह ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और वर्तमान में दोनों बहनें चिकित्सकों की गहन निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार की मदद के लिए चंबा के सामाजिक संगठन आगे आए, जिससे यह सर्जरी संभव हो सकी।
नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अभिनव राणा ने बताया कि अस्पताल के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब एक ही माह में ऐसे दो मामले सामने आए, जिनमें एक में पति ने पत्नी को और दूसरे में बड़ी बहन ने छोटी बहन को किडनी देकर जान बचाई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन और प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा के सहयोग से संस्थान में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं मरीजों को मिल रही हैं। टांडा अस्पताल में अब तक कुल 29 सफल किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।
ट्रांसप्लांट में यह विशेषज्ञ टीम रही शामिल
इस जटिल शल्य प्रक्रिया को सफल बनाने में ट्रांसप्लांट सर्जरी विभाग से डॉ. अमित शर्मा, डॉ. कुशल कुमार और डॉ. हर्षिका चौधरी शामिल रहे। नेफ्रोलॉजी विभाग से डॉ. अभिनव राणा, डॉ. दिव्यम के. शर्मा और डॉ. साक्षी कपूर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अनिता शर्मा व डॉ. अमन ठाकुर के साथ ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर नीरज जम्वाल, पूनम ठाकुर और ऑपरेशन थिएटर (ओटी) के तकनीकी व नर्सिंग स्टाफ का योगदान सराहनीय रहा।