Health News: अनचाही प्रेग्नेंसी से बचने के लिए कई कपल्स ‘पुलआउट मेथड’ का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, यह तरीका कई बार फेल हो जाता है और अनवांटेड प्रेग्नेंसी का कारण बनता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शिल्पा चौहान ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है।
डॉक्टर चौहान के अनुसार, जब पुरुष इजैकुलेशन से ठीक पहले पेनिस को बाहर निकाल लेते हैं, तो इसे पुलआउट मेथड कहा जाता है। कपल्स को लगता है कि स्पर्म अंदर नहीं गया, लेकिन गर्भनिरोध का यह तरीका सबसे ज्यादा फेल होने वाले तरीकों में शामिल है।
प्री-इजैकुलेशन फ्लूइड में मौजूद स्पर्म बनते हैं प्रेग्नेंसी की वजह
डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि इजैकुलेशन से ठीक पहले निकलने वाले प्री-इजैकुलेशन फ्लूइड में भी स्पर्म मौजूद हो सकते हैं। यह फ्लूइड संबंध के दौरान आसानी से वजाइना तक पहुंच जाता है। इसके कारण महिला के प्रेग्नेंट होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।
इसके अलावा, संबंध बनाते समय कई बार स्पर्म की कुछ बूंदें अंदर रह जाती हैं। डॉक्टर का कहना है कि हर गर्भनिरोधक तरीके का कुछ प्रतिशत फेलियर रेट होता है। लेकिन पुलआउट मेथड में अनचाही प्रेग्नेंसी का जोखिम अन्य वैज्ञानिक तरीकों की तुलना में काफी अधिक होता है।
मायो क्लिनिक की रिपोर्ट और बीमारियों का खतरा
मायो क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरीके को लगातार एक साल तक इस्तेमाल करने पर 5 में से 1 कपल के प्रेग्नेंट होने का जोखिम रहता है। इसका मुख्य कारण सही समय पर सेल्फ कंट्रोल न होना या प्री-इजैकुलेशन फ्लूइड में स्पर्म का होना माना जाता है।
गैंरटीड सुरक्षा न मिलने के साथ-साथ यह तरीका सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) और अन्य इंफेक्शन के खतरे को भी बढ़ाता है। इसलिए विशेषज्ञ अनचाही प्रेग्नेंसी और बीमारियों से बचाव के लिए केवल पुलआउट मेथड पर निर्भर न रहने की सलाह देते हैं।
