कैंसर की 543 दवाओं पर NPPA का बड़ा फैसला: कीमतों में 90% तक की भारी कटौती, पर पेटेंटेड दवाएं अब भी महंगी

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New Delhi News: नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 543 दवाओं के ब्रांड्स और उनके पैक साइज की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) में बड़ा संशोधन किया है। सरकार के इस कदम से कई जेनेरिक और बायोसिमिलर दवाओं के दाम में 90 प्रतिशत से भी अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, कीट्रूडा जैसी कई प्रमुख और महंगी पेटेंटेड ओरिजिनैटर दवाओं की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

NPPA द्वारा जारी नई मूल्य सूची के अनुसार, कैंसर रोधी कई अहम दवाओं के दाम रिकॉर्ड स्तर तक घटे हैं। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में दी जाने वाली पैल्बोसिक्लिब (125 mg) दवा ‘पालबोप्रो’ की कीमत 40,421 रुपये से घटकर मात्र 2,720 रुपये रह गई है, जो लगभग 93.3 प्रतिशत की सीधी कटौती है। इसी तरह ‘ISOGEN’ (100 mg) के दाम में 91.6 प्रतिशत की कमी आई है।

कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली थियोटेपा दवा ‘SAMTEPA’ (100 mg) की कीमत 80,072 रुपये से घटाकर 7,150 रुपये प्रति वायल तय की गई है, जिससे प्रति वायल 72,922 रुपये की सीधी बचत होगी। इसके अलावा एनास्ट्रोज़ोल (‘वोमाज़ोल’ 1 mg) की कीमत 458.85 रुपये से घटकर 39.52 रुपये हो गई है। दासतिनिब, लेनवातिनिब, एबिराटेरोन और ओलापारिब जैसी दवाओं के दाम भी काफी कम हुए हैं।

पेटेंटेड ओरिजिनैटर दवाएं अब भी मरीजों की पहुंच से दूर

कीमतों पर नियंत्रण के बावजूद कई बहुचर्चित लाइफ-सेविंग दवाएं सस्ती नहीं हो सकी हैं। 21 से ज्यादा प्रकार के कैंसर के इलाज में कारगर इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा (Pembrolizumab) की एमआरपी अभी भी 2,16,500 रुपये पर बनी हुई है।

इसी प्रकार ब्रेस्ट कैंसर की दवा क्राइक्साना (Ribociclib) बिना किसी बदलाव के 24,435 रुपये पर बिक रही है। टैग्रिसो, टेसेंट्रिक, डारज़ालेक्स और इमफिंजी जैसे अन्य ओरिजिनैटर ब्रांड्स की आधिकारिक कीमतों में भी कोई कटौती दर्ज नहीं की गई है।

एक ही साल्ट के अलग-अलग ब्रांड्स में बड़ा अंतर

सरकारी आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि यह कटौती सभी ब्रांड्स पर एक समान प्रभावी नहीं हुई है। जहां पैल्बोसिक्लिब के कई ब्रांड 90 प्रतिशत से अधिक सस्ते हुए हैं, वहीं इसी साल्ट की दवा ‘पैलेनो’ (100 mg) की कीमत 5,717.81 रुपये से घटकर केवल 5,624.10 रुपये हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मरीजों को इस मूल्य कटौती का वास्तविक लाभ तभी मिल सकेगा जब डॉक्टर उन्हें किफायती ब्रांड्स लिखकर देंगे।

ट्रेड मार्जिन पर नियंत्रण और सुप्रीम कोर्ट का रुख

यह कदम अस्पतालों और बिचौलियों द्वारा लिए जाने वाले भारी मुनाफे पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद उठाया गया है। अदालत देश की सभी गैर-अनुसूचित दवाओं के ‘ट्रेड मार्जिन’ (व्यापारिक लाभ) पर सीमा तय करने पर विचार कर रही है और इस पर फैसला सुरक्षित रख चुकी है।

NPPA ने इस बार सीधी मूल्य सीमा के बजाय सप्लाई चेन के मार्जिन को सीमित करने पर जोर दिया है। ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क (AIDAN) की प्रतिनिधि मालिनी ऐसोला के अनुसार, सरकार द्वारा पेशेंट असिस्टेंस प्रोग्राम (PAP) वाली पेटेंटेड दवाओं को छूट दिए जाने और बिचौलियों को 42.8 प्रतिशत तक मार्जिन रखने की अनुमति के कारण कुछ महंगी दवाएं सस्ती नहीं हो पाई हैं। वहीं विशेषज्ञों ने मांग की है कि अति-महत्वपूर्ण दवाओं के लिए सरकार को ‘कंपल्सरी लाइसेंसिंग’ का विकल्प चुनना चाहिए ताकि इनके किफायती जेनेरिक विकल्प तैयार किए जा सकें।

Desh Raj
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