Delhi News: दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में एक दशक से गंभीर माइग्रेन से पीड़ित मरीज की सफल ‘एडवांस्ड एंडोस्कोपिक माइग्रेन सर्जरी’ की गई है। दवाओं से राहत न मिलने के बाद डॉक्टरों ने सिर के ट्रिगर पॉइंट्स की पहचान कर नसों का दबाव कम किया, जिससे मरीज के असहनीय सिरदर्द में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है।
दिल्ली के एक निजी अस्पताल में लगभग दस वर्षों से गंभीर और लगातार माइग्रेन से पीड़ित एक मरीज की सफल ‘एडवांस्ड एंडोस्कोपिक माइग्रेन सर्जरी’ की गई है। यह सर्जरी अस्पताल के सीनियर प्लास्टिक सर्जन डॉ. स्वरूप सिंह गंभीर के नेतृत्व में पूरी हुई। मरीज लंबे समय से पारंपरिक मेडिकल इलाज ले रहा था, लेकिन उसे कोई स्थायी लाभ नहीं मिल पा रहा था।
सर्जरी से पहले मरीज को हर महीने 20 से 25 बार माइग्रेन के गंभीर दौरे पड़ते थे। इस असहनीय दर्द के कारण उसके रोजमर्रा के काम और जीवन की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हो रही थी। कई सालों तक विभिन्न विशेषज्ञों से परामर्श और तरह-तरह की दवाएं लेने के बावजूद सिरदर्द की समस्या लगातार बनी रही।
ट्रिगर पॉइंट्स की पहचान और क्लिनिकल मूल्यांकन
मरीज की स्थिति और सर्जरी की उपयुक्तता जांचने के लिए विस्तृत क्लिनिकल मूल्यांकन किया गया। जांच के दौरान सिर के टेम्पोरल यानी कनपटी के पास और ओसीसीपिटल यानी सिर के पिछले हिस्से में ट्रिगर पॉइंट्स की पहचान और पुष्टि की गई। ये वे हिस्से थे जहां की नसें मरीज के तीव्र सिरदर्द का कारण बन रही थीं। कुछ मामलों में संबंधित नसों की पुष्टि के लिए ‘डायग्नोस्टिक नर्व ब्लॉक’ का भी सहारा लिया जाता है, जिससे यह तय किया जा सके कि कौन सी नस समस्या पैदा कर रही है।
क्या है एंडोस्कोपिक माइग्रेन सर्जरी
‘एंडोस्कोपिक माइग्रेन सर्जरी’ एक विशेष सर्जिकल प्रक्रिया है। यह उन चुनिंदा मरीजों के लिए विकल्प बनती है जिनके माइग्रेन के लक्षण शरीर की खास नसों (पेरिफेरल नर्व्स) के ट्रिगर पॉइंट्स से जुड़े होते हैं। कई बार माथे, कनपटी या सिर के पिछले हिस्से की मांसपेशियां और कनेक्टिव टिश्यू नसों पर दबाव डालते हैं या उन्हें इरिटेट करते हैं।
इस प्रक्रिया में कैमरे से लैस एक पतले उपकरण (एंडोस्कोप) का उपयोग किया जाता है। पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में इसमें बहुत छोटे चीरे लगाकर प्रभावित नसों तक पहुंचा जाता है और उन टिश्यूज को हटा दिया जाता है जो नसों पर दबाव बना रहे होते हैं। इसे नर्व डिकंप्रेशन कहा जाता है।
सर्जरी के बाद मरीज को मिली राहत
सर्जरी के बाद मरीज के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया है। मरीज के अनुसार, कनपटी के पास होने वाले सिरदर्द की तीव्रता और उसकी अवधि में लगभग 50 फीसदी की कमी आई है। वहीं, सिर के पिछले हिस्से में रहने वाला लगातार दर्द पूरी तरह समाप्त हो गया है, हालांकि हल्का भारीपन अभी महसूस होता है। इन नतीजों से मरीज की दवाओं पर निर्भरता काफी कम हुई है।
सर गंगा राम अस्पताल के सीनियर प्लास्टिक सर्जन डॉ. स्वरूप सिंह गंभीर ने बताया कि माइग्रेन की सर्जरी उन मरीजों के लिए एक विशेष प्रक्रिया है, जिन्हें बेहद गंभीर दौरे पड़ते हैं और किसी भी दवा से आराम नहीं मिलता। इसमें माइग्रेन को ट्रिगर करने वाले खास पॉइंट्स पर काम करके मरीज के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया माइग्रेन का पहला या सार्वभौमिक इलाज नहीं है और न ही यह हर मरीज के लिए उपयुक्त है। इसके लिए सही मरीज का चयन, सिरदर्द का इतिहास, पिछली दवाओं का प्रभाव और पेरिफेरल नर्व ट्रिगर साइट्स की सटीक पहचान बेहद जरूरी होती है।