Vidisha News: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में हुए 30.18 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) शोभित त्रिपाठी और उनके सहयोगी की 5.37 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं।
मध्य प्रदेश में गरीब और निर्माण श्रमिकों की बेटियों के विवाह के लिए संचालित मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में सामने आए फर्जीवाड़े को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सख्त कदम उठाया है। विदिशा जिले के सिरोंज जनपद पंचायत में हुए 30.18 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के तहत एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत तत्कालीन जनपद सीईओ शोभित त्रिपाठी और उनके सहयोगी हेमंत साहू की 5.37 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, शोभित त्रिपाठी ने जनपद पंचायत में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया और 5,923 फर्जी विवाह दिखाकर करोड़ों रुपये की सरकारी राशि का गबन किया। मामले में ईडी ने करीब दो माह पहले, दो सितंबर 2026 को आरोपी शोभित त्रिपाठी को गिरफ्तार किया था, जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है।
फर्जी दस्तावेज और लॉकडाउन में भी बांटी गई राशि
योजना के नियमों के तहत पंजीकृत गरीब निर्माण श्रमिकों की बेटियों के विवाह के लिए राज्य सरकार की ओर से 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। जांच में खुलासा हुआ है कि शोभित त्रिपाठी ने वर्ष 2019 से नवंबर 2021 के बीच सिरोंज जनपद पंचायत के सीईओ पद पर रहते हुए अन्य लोगों के साथ साठगांठ की और 5,923 संदिग्ध प्रकरणों में करीब 30.18 करोड़ रुपये स्वीकृत कर वितरित किए।
एजेंसी की जांच में सामने आया कि अपात्र लोगों के नाम पर फर्जी आवेदन और दस्तावेज तैयार किए गए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खोले गए और सरकारी योजना की राशि इन खातों में ट्रांसफर करने के बाद नकद रूप में निकाल ली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान जब सार्वजनिक विवाह कार्यक्रमों पर पूरी तरह प्रतिबंध था, तब भी बड़ी संख्या में विवाह दिखाकर राशि का आहरण किया गया।
ईओडब्ल्यू की एफआईआर पर आधारित है ईडी की जांच
इस वित्तीय घोटाले को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू), भोपाल द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ईओडब्ल्यू की इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू की थी। जांच एजेंसी का कहना है कि पूरे सिंडिकेट और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल के लिए आगे की जांच जारी है।