Horticulture Department News: आलू की खेती की तैयारी कर रहे किसानों के लिए उद्यान विभाग ने विभिन्न किस्मों का आधारित बीज उपलब्ध कराया है। निर्धारित दरों पर बीज खरीदने वाले किसानों को प्रति क्विंटल 1000 रुपये का अनुदान सीधे बैंक खाते में दिया जाएगा। वितरण ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जा रहा है।
आलू की बुवाई की तैयारी में जुटे किसानों के लिए उद्यान विभाग की योजना लागत घटाने और पैदावार बढ़ाने का बेहतर अवसर लेकर आई है। विभाग द्वारा आलू की उन्नत किस्मों का आधारित बीज उपलब्ध कराया गया है। योजना के तहत किसान निर्धारित दरों पर बीज खरीदकर प्रति क्विंटल 1,000 रुपये का अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। यह अनुदान राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। बीज का वितरण ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जा रहा है, इसलिए समय रहते खरीद करना किसानों के लिए लाभकारी रहेगा।
किस्मों के अनुसार बीज की निर्धारित दरें
जिला उद्यान अधिकारी मृत्युंजय सिंह के अनुसार, विभाग में कुफरी बहार और कुफरी ख्याति जैसी प्रमुख किस्मों के बीज उपलब्ध कराए गए हैं। कुफरी बहार आधारित प्रथम सीड साइज का बीज 3,630 रुपये प्रति क्विंटल तथा द्वितीय सीड साइज का बीज 3,480 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिल रहा है।
वहीं, कुफरी ख्याति आधारित प्रथम सीड साइज का बीज 3,630 रुपये प्रति क्विंटल और प्रथम ओवर साइज का बीज 3,040 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। विभाग द्वारा दिए जाने वाले 1,000 रुपये प्रति क्विंटल के अनुदान के बाद किसानों के लिए प्रभावी खरीद लागत काफी कम हो जाएगी।
बाजार भाव और आधारित बीज की गुणवत्ता में अंतर
वर्तमान में खुले बाजार में डायमंड आलू 7 से 9 रुपये, चिप्सौना 13 से 15 रुपये और पहाड़ी आलू 19 से 22 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि खुले बाजार में बिकने वाले सामान्य आलू और प्रमाणित अथवा आधारित बीज की गुणवत्ता और उपयोगिता में बड़ा अंतर होता है। इसलिए दोनों की तुलना केवल प्रति किलो भाव से करना सही नहीं है। उद्यान विभाग से मिलने वाला आधारित बीज विशेष रूप से आगामी फसल के लिए तैयार किया गया है, जिससे स्वस्थ फसल और उच्च पैदावार की संभावना बढ़ जाती है।
एक हेक्टेयर में 350 से 400 क्विंटल उत्पादन का अनुमान
वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक अनिल कुमार के अनुसार, एक हेक्टेयर खेत में आलू की बुवाई के लिए लगभग 35 क्विंटल बीज की जरूरत होती है। यदि उचित कृषि प्रबंधन, संतुलित उर्वरक और अनुकूल मौसम रहे, तो प्रति हेक्टेयर 350 से 400 क्विंटल तक उत्पादन हासिल किया जा सकता है। इसका मतलब है कि बीज की मात्रा के मुकाबले किसान 10 से सवा 11 गुना तक उपज प्राप्त कर सकते हैं। उन्नत गुणवत्ता के बीज और वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
आवश्यक दस्तावेज और खरीद प्रक्रिया
बीज प्राप्त करने के इच्छुक किसानों को अपने साथ पहचान प्रमाण पत्र (आधार कार्ड), बैंक पासबुक की छायाप्रति और जमीन की खतौनी लानी होगी। विभाग के अनुसार बीज की उपलब्धता सीमित है, इसलिए किसान बिना देरी किए जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें और समय पर उन्नत बीज प्राप्त करें।