Business Desk: वैश्विक निवेशकों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विदेशी फंड अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर शेयरों से अपना पैसा निकाल रहे हैं। ये फंड भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में बैंकिंग, आईटी और अन्य सुरक्षित सेक्टरों में निवेश बढ़ा रहे हैं। इस बदलाव से एशियाई बाजारों में नया माहौल बन रहा है।
ब्लूमबर्ग की एक नई रिपोर्ट के अनुसार फिडेलिटी इंटरनेशनल, बीएनपी पारिबा और एमएंडजी इन्वेस्टमेंट्स जैसे बड़े निवेशकों ने कदम पीछे खींचे हैं। इन वैश्विक संस्थाओं ने दक्षिण कोरिया और ताइवान की एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है। एआई पर हो रहे भारी खर्च से मिलने वाले मुनाफे को लेकर अब अनिश्चितता बढ़ गई है।
ताइवान और कोरिया से पैसा निकालकर भारत में लगाया
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों पर दबाव साफ दिख रहा है। वहां के बाजारों में उतार-चढ़ाव काफी बढ़ गया है। फंड मैनेजर अब बैंकिंग, आईटी, ई-कॉमर्स और कम जोखिम वाले क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी वजह से एशियाई बाजारों का पूरा समीकरण तेजी से बदल रहा है।
दूसरी तरफ भारत और चीन एक बार फिर विदेशी निवेशकों की पहली पसंद बन गए हैं। जुलाई महीने में भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश काफी बढ़ा है। इससे आईटी सेक्टर सहित कई बड़े उद्योगों को मजबूती मिली है। वहीं चीन की इंटरनेट और बैंकिंग कंपनियों में भी विदेशी फंडों की दिलचस्पी तेजी से लौट रही है।
इंडोनेशिया और थाईलैंड के बाजारों में भी निवेशकों की खरीदारी से अच्छी बढ़त दर्ज हुई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशक अब अत्यधिक जोखिम वाले एआई शेयरों से दूरी बना रहे हैं। वैश्विक फंड अब बेहतर मूल्यांकन और स्थिर रिटर्न देने वाले दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।