District News: जिले में कोयले की कमी और आसमान छूती कीमतों के कारण अक्टूबर समाप्त होने के बावजूद ईंट भट्ठों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। वर्तमान में पुराने स्टॉक से ही ईंटों की आपूर्ति की जा रही है। कारोबारियों के मुताबिक नया उत्पादन न होने से आगामी दिनों में निर्माण कार्यों पर सीधा असर पड़ सकता है।
जिले में स्थापित 160 ईंट भट्ठों का संचालन इस वर्ष समय पर शुरू नहीं हो सका है। आम तौर पर इन भट्ठों पर उत्पादन कार्य अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह के मध्य शुरू हो जाता है। हालांकि, इस बार कोयले की अनुपलब्धता और दरों में भारी उछाल के चलते संचालक नई ईंटें तैयार करने से बच रहे हैं। वर्तमान में बाजार में पुराने बचे हुए स्टॉक से ही मांग पूरी की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि यदि अगले माह तक स्थिति सामान्य नहीं हुई और स्टॉक खत्म हो गया, तो विकास और निर्माण कार्यों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
रानीगंज और यूएसए कोल के दामों में बड़ा उछाल
ईंट भट्ठों में ईंट पकाने के लिए मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और झारखंड के रानीगंज क्षेत्र की खदानों से कोयला मंगवाया जाता है। इसके अतिरिक्त आयातित यूएसए (USA) कोल की भी खपत अधिक रहती है, क्योंकि सामान्य कोयले के मुकाबले इसकी मात्रा कम लगती है। समुद्री मार्ग से बंदरगाहों पर पहुंचने के बाद यह कोयला थोक व्यापारियों के माध्यम से स्थानीय भट्ठों तक पहुंचता है।
ईंट भट्ठा व्यवसायी और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य शुभम खन्ना ने बताया कि पिछले दो महीनों में कोयले के दामों में अप्रत्याशित तेजी आई है। यूएसए कोल का भाव बढ़कर 26 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जिसमें लगभग 7 हजार रुपये की वृद्धि हुई है। वहीं, रानीगंज का कोयला जो पहले 16 हजार रुपये में मिलता था, अब 22 हजार रुपये में मिल रहा है।
ईंटों की उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका
कारोबारियों का कहना है कि बरसात के मौसम में खदानों में पानी भरने और खोदाई प्रभावित होने की वजह से आपूर्ति पर असर पड़ता रहा है, लेकिन इस बार कीमतों में चार हजार रुपये से अधिक का अंतर देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान को भी इस तेजी की एक वजह बताया जा रहा है।
शुभम खन्ना के अनुसार, महंगे कोयले के कारण प्रति हजार ईंट के उत्पादन की लागत में भारी इजाफा होगा। वर्तमान में एक हजार ईंटों का भाव छह हजार रुपये के आसपास है, लेकिन बढ़े हुए दामों वाले कोयले से निर्माण करने पर यह दर साढ़े सात हजार रुपये प्रति हजार ईंट तक पहुंच सकती है। लागत में इस तेज बढ़ोतरी को देखते हुए संचालकों ने फिलहाल नए उत्पादन पर रोक लगा रखी है और कीमतें सामान्य होने के बाद ही भट्ठे पूरी क्षमता से संचालित करने का निर्णय लिया है।