London News: यूरोपीय जलवायु एजेंसी कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस ने दुनिया भर के तापमान को लेकर चिंताजनक आंकड़े जारी किए हैं। एजेंसी के अनुसार इस साल का अगस्त महीना इतिहास के सबसे गर्म महीने के रूप में दर्ज हुआ है। बढ़ते ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और अल नीनो प्रभाव के कारण वैश्विक तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
औद्योगीकरण से पहले के मुकाबले बढ़ा वैश्विक औसत तापमान
सी3एस के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में वैश्विक औसत तापमान औद्योगीकरण के पहले के दौर से 1.65 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया। नवंबर 2025 के बाद यह पहली बार है जब तापमान में इतनी तेज वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जीवाश्म ईंधन जलाने से लगातार गर्मी बढ़ रही है।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन के कार्यकारी सचिव साइमन स्टिल ने चेतावनी दी कि कोयला, तेल और गैस का भारी उपयोग धरती को झुलसा रहा है। इससे लाखों लोगों के जीवन और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच रहा है। परिवहन व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर पड़ रहा है तथा खाद्य संकट गहराने की आशंका है।
वेधशाला के अनुसार इस साल ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर समुद्र की सतह का औसत तापमान 21.07 डिग्री सेल्सियस के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसने पिछले साल के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। प्रशांत क्षेत्र में मजबूत अल नीनो के कारण समुद्र की गर्मी में लगातार इजाफा हो रहा है।