Kolhapur News: कोल्हापुर के गोकुल डेयरी चुनाव को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा सरकार पर नियमों में फेरबदल कर जनादेश बदलने का आरोप लगाने के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार किया है। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि बैठक में कोरम की कमी के कारण कानूनी सलाह लेकर अध्यादेश लाया गया।
कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुल डेयरी) के संचालक मंडल चुनाव के बाद शुरू हुआ विवाद अब दिल्ली और मुंबई के बीच सियासी तकरार में बदल गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर राज्य की महायुति सरकार पर निशाना साधा, जिसके बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस नेता 4,500 मतदाताओं वाली एक स्थानीय सहकारी संस्था के चुनाव पर दिल्ली में बैठकर राजनीति कर रहे हैं।
कोरम के संकट और अध्यादेश पर मुख्यमंत्री का रुख
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि गोकुल के 25 सदस्यीय निदेशक मंडल के चुनाव में किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था; एक धड़े को 13 और दूसरे को 12 सीटें मिली थीं। उन्होंने बताया कि अध्यक्ष के चुनाव के लिए आवश्यक 14 निदेशकों का कोरम पूरा न होने से बैठकें दो बार रद्द करनी पड़ीं। यदि तीसरी बार भी कोरम के अभाव में बैठक रद्द होती तो पूरी चुनाव प्रक्रिया ही निरस्त हो जाती।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने एडवोकेट जनरल से कानूनी राय लेने के बाद ही कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि यह कोई राष्ट्रीय स्तर का मामला नहीं है, फिर भी इसमें अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने लगाया जनादेश में हेरफेर का आरोप
इससे पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया था कि गोकुल डेयरी में दूध उत्पादकों द्वारा महायुति गठबंधन को हराने के बाद सरकार ने चुनाव के नियम बदल दिए। राहुल गांधी ने लिखा कि सरकार ने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में 4 और सदस्य जोड़कर 12 की संख्या को 16 कर दिया ताकि बहुमत हासिल किया जा सके। उन्होंने इसे “दूध उत्पादकों के वोटों की चोरी” और जनादेश के साथ खिलवाड़ करार दिया।
19 अक्टूबर के चुनाव से लेकर हाई कोर्ट तक का घटनाक्रम
गोकुल दूध संघ के 25 संचालक पदों के लिए 19 अक्टूबर 2026 को मतदान हुआ था, जिसमें 99 फीसदी से अधिक वोट पड़े थे। मतगणना के बाद कांग्रेस एमएलसी सतेज पाटिल के नेतृत्व वाली ‘राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी अघाड़ी’ ने 13 सीटें जीतकर बढ़त बनाई, जबकि भाजपा समर्थित महायुति पैनल को 12 सीटें मिलीं।
इसके बाद अध्यक्ष चुनाव के लिए महायुति के 12 निदेशकों द्वारा बैठकों में भाग न लेने से 14 सदस्यों का कोरम नहीं बन सका। इस पर सतेज पाटिल गुट ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने सभी 25 निदेशकों को नोटिस जारी कर 10 नवंबर 2026 को अध्यक्ष पद का चुनाव कराने का निर्देश दिया था।
कैबिनेट का नया अध्यादेश और विपक्ष का विरोध
अदालत द्वारा तय तारीख से पहले 4 नवंबर 2026 को महाराष्ट्र कैबिनेट ने 500 करोड़ रुपये से अधिक के सालाना टर्नओवर वाली सहकारी संस्थाओं की प्रबंध समितियों में सरकार द्वारा पांच सदस्य नामित करने के अध्यादेश को मंजूरी दी। इनमें से चार सदस्यों को पूर्ण मतदान अधिकार दिए गए, जिससे बोर्ड में महायुति गठबंधन का संख्या बल 16 हो गया।
इस निर्णय के खिलाफ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। वहीं कोल्हापुर में एमएलसी सतेज पाटिल ने इस अध्यादेश के विरोध में दशहरा चौक से जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालने की घोषणा की है, जबकि एनसीपी (शरदचंद्र पवार) ने गोकुल डेयरी मुख्यालय के घेराव का आह्वान किया है।