New Delhi News: भारत ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत डील की फाइनल शर्तें तभी साझा करेगा जब अमेरिका प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारतीय सामानों पर बेहतर और रियायती टैरिफ देगा। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।
पीयूष गोयल ने ‘लीवरेजिंग एफटीए आउटरीच प्रोग्राम’ पर आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने साफ किया कि जैसे ही अमेरिका अन्य देशों के मुकाबले भारत को रियायती दरें देने के लिए तैयार होगा, वैसे ही इस द्विपक्षीय समझौते को अंतिम रूप देकर पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से घोषित की जाएगी।
द्विपक्षीय व्यापार समझौते के ड्राफ्ट पर अमेरिकी पक्ष का बयान
इससे पहले जुलाई में अमेरिका के एक सीनियर अधिकारी ने दावा किया था कि दोनों देशों के बीच समझौते का ड्राफ्ट लगभग तैयार हो चुका है। अधिकारी के अनुसार इसे आगामी तीन से चार महीनों के भीतर साइन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह देरी प्रशासनिक प्रक्रियाओं की वजह से हो रही है।
हालांकि अमेरिका के सेक्शन 301 के तहत जारी ट्रेड जांच को इस समझौते की राह में मुख्य बाधा माना जा रहा है। भारत का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी बाजार में आसान पहुंच हासिल करना और व्यापारिक रुकावटों को घटाना है। भारत चाहता है कि उसके घरेलू कारोबारियों और निर्यातकों को ग्लोबल स्तर पर सीधा आर्थिक लाभ मिले।
टैरिफ नीति को लेकर अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ भारत
भारत इस व्यापार समझौते को लेकर अपनी मूल शर्तों पर लगातार कायम है। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति के विरोध में नई दिल्ली की मांग है कि अमेरिका ऐसा टैरिफ ढांचा बनाए जिससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी मुल्कों से ज्यादा बढ़त मिले। जब तक यह तय नहीं होता तब तक भारत समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा।