New Delhi News: नेपाल और तिब्बत सीमा पर भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही हुई है। इस भीषण आपदा में 626 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,482 से ज्यादा लोग लापता हैं। संकट की इस घड़ी में भारत ने तुरंत मानवीय मदद का हाथ आगे बढ़ाया है।
भारतीय वायुसेना का C-130J विमान भोजन और दवाओं जैसी 10 टन आवश्यक जीवनरक्षक सामग्री लेकर नेपाल पहुंच चुका है। वायुसेना ने राहत कार्यों को तेज करते हुए C-17 ग्लोबमास्टर और अतिरिक्त विमानों के जरिए भारी सामग्री भेजने की तैयारी पूरी कर ली है। इसके अलावा 11 सदस्यीय विशेषज्ञ भारतीय टीम भी शनिवार को काठमांडू पहुंच गई।
टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ और बेली ब्रिज की मदद
नेपाल सरकार के अनुरोध पर भेजी गई भारतीय टीम में मेडिकल स्टाफ और टनल रेस्क्यू के तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार जटिल संरचनाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता ली जा रही है। परिवहन बहाल करने के लिए नेपाल ने भारत और चीन से 42 पोर्टेबल बेली ब्रिज बनाने में तकनीकी सहयोग मांगा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल से 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें त्रिशूली-1 हाइड्रो प्रोजेक्ट के 63 कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री शामिल हैं। तमिलनाडु के सभी 21 नागरिक काठमांडू के रास्ते सुरक्षित नई दिल्ली पहुंच चुके हैं।
320 भारतीय नागरिकों से संपर्क साधने की कोशिश
विदेश मंत्रालय के अनुसार 149 भारतीय नागरिक तिब्बत से नेपाल सीमा में प्रवेश कर चुके हैं, जबकि करीब 400 नागरिक चीनी सीमा की तरफ पूरी तरह सुरक्षित हैं। फिलहाल नेपाल में फंसे 320 भारतीय नागरिकों और 100 भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों से संपर्क स्थापित करने के प्रयास लगातार जारी हैं।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार शाम तक किसी भी भारतीय नागरिक की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन मलबे और सुरंगों में फंसे सभी लोगों की तलाश के लिए संयुक्त अभियान चला रहे हैं। भारत सरकार पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।