New Delhi News: देश के कई हिस्सों में हुई हालिया बारिश के बावजूद मानसून की समग्र कमी में खास सुधार नहीं हुआ है। अगस्त के पहले सप्ताह में बारिश की कमी में केवल एक प्रतिशत की गिरावट आई। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे कृषि प्रधान राज्यों में अब भी पानी का संकट बना हुआ है।
खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ा बारिश की देरी का असर
देश में ज्यादातर बारिश उस समय हुई जब लगभग 88 प्रतिशत खरीफ फसलों की बुआई का काम पूरा हो चुका था। देरी से हुई इस वर्षा के कारण बुआई के कुल रकबे में कोई बड़ा सुधार दर्ज नहीं किया गया। मुख्य खरीफ फसल धान का रकबा पिछले साल के मुकाबले अब भी चार प्रतिशत कम दर्ज किया गया है।
हालांकि अगस्त माह में हुई बारिश से देश के प्रमुख जलाशयों में जल स्तर सुधरने की उम्मीद जताई गई है। जलाशयों में जल संचय बेहतर होने से पनबिजली उत्पादन में मदद मिलेगी और आगामी रबी सीजन की सिंचाई के लिए जल बैक-अप तैयार होगा, जो कृषि अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से एक राहत भरा संकेत माना जा रहा है।
बारह राज्यों में जारी है सामान्य से बेहद कम बारिश का संकट
मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश के बारह राज्यों में बीस प्रतिशत या उससे अधिक बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है। इस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे मुख्य मानसूनी राज्य शामिल हैं, जहां सिंचाई की आधुनिक सुविधाएं सीमित होने के कारण खेती पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर ही निर्भर रहती है।
आईएमडी की भविष्यवाणी के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के पास कम दबाव का क्षेत्र बनने से 13 अगस्त से बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी। इससे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार में मानसूनी वर्षा बढ़ने की संभावना है, जिससे धान और मक्के की बची हुई बुआई को नई गति मिल सकती है।
क्षेत्रीय आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य भारत को छोड़कर बाकी सभी हिस्सों में मानसूनी बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहा है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 17 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 11 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।