New Delhi News: कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले भारतीय श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में अहम जानकारी दी है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास नेपाली अधिकारियों के साथ लगातार तालमेल बनाए हुए है।
बिना वैध दस्तावेज नेपाल न जाने की दी गई सलाह
विदेश मंत्रालय को निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से नेपाल पहुंचे कई भारतीयों से मदद के अनुरोध मिले हैं। इन यात्रियों के पास आवश्यक चीनी वीजा और प्रवेश परमिट नहीं थे, जिससे वे वहां फंस गए। सरकार ने एडवाइजरी जारी कर पूरे दस्तावेज मिलने के बाद ही यात्रा शुरू करने को कहा है।
आपात स्थिति में दूतावास कराएगा मेडिकल और रहने की सुविधा
विदेश राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि खराब मौसम, स्वास्थ्य आपातकाल या कागजी दिक्कतों के समय दूतावास तुरंत सहायता प्रदान करता है। दूतावास यात्रियों के लिए सुरक्षित निकासी, अस्थायी आश्रय, चिकित्सा उपचार और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करता है।
वर्ष 2025 में 688 श्रद्धालुओं ने की थी यात्रा
सरकार ने बताया कि महामारी और कूटनीतिक कारणों से 2020 से 2024 तक बंद रहने के बाद 2025 में यात्रा फिर से शुरू हुई। कूटनीतिक प्रयासों के चलते 2025 में 688 भारतीय श्रद्धालुओं ने यात्रा पूरी की। धार्मिक दृष्टि से यह यात्रा बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण मानी जाती है।
यात्रियों को नहीं दी जाती सीधी आर्थिक सब्सिडी
कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि सरकार कैलाश मानसरोवर यात्रियों को कोई सीधी वित्तीय सब्सिडी या आर्थिक मदद नहीं देती। यह यात्रा पूरी तरह स्व-वित्तपोषित आधार पर चलती है। हालांकि, सरकार परिवहन, मेडिकल जांच और ठहरने के लॉजिस्टिक्स का उचित प्रबंध करती है।