Business News: मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद क्रूड ऑयल के दाम तेजी से टूटे हैं, जिससे भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की उम्मीदें जग गई हैं।
सोमवार को आठ फीसदी से ज्यादा की गिरावट के बाद अमेरिकी मानक कच्चा तेल यानी डब्ल्यूटीआई 82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, ब्रेंट क्रूड में भी तीन महीने की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई और यह 88.36 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बंद हुआ।
डोनाल्ड ट्रंप के बयान से बाजार में घटा तनाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ईरान पर सैन्य हमले रोकने का फैसला लिया है, ताकि कूटनीतिक बातचीत को एक और मौका दिया जा सके। ट्रंप के इस रुख से मध्य पूर्व में जारी तनाव कम हुआ है, जिसका सीधा असर तेल बाजार पर दिखा।
हालांकि, ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलमार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ईरान और ओमान के अधिकारी इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से शिपिंग फिर से शुरू कराने के लिए बातचीत कर रहे हैं। इस रास्ते से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल गुजरता है।
सप्लाई बहाल होने से तेल बाजार में सरप्लस का अनुमान
ईरानी सेना ने भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका द्वारा हमले रोके जाने के बाद उसने अमेरिकी ठिकानों पर अपनी जवाबी कार्रवाई स्थगित कर दी है। दूसरी ओर, कजाकिस्तान के मुख्य टर्मिनल से भी तेल का निर्यात दोबारा शुरू हो गया है, जिससे वैश्विक सप्लाई की बाधाएं कम हुई हैं।
वित्तीय विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाता है, तो बाजार में कच्चे तेल की भारी आपूर्ति देखने को मिलेगी। साल के अंत तक प्रतिदिन 20 लाख बैरल का अतिरिक्त सरप्लस होने से कीमतें और नीचे आ सकती हैं।