गंगा नदी पर चिकन खाना कोई अपराध नहीं, वाराणसी मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस का बड़ा बयान

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Varanasi News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी की नाव पर इफ्तार पार्टी करने और मांसाहार करने के मामले में जेल में बंद युवकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि गंगा नदी पर किसी को चिकन खाने से रोकने वाला कोई कानून नहीं है।

भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जस्टिस उज्जल भुइयां ने यह टिप्पणी की। उन्होंने दुख जताया कि देश में युवाओं को ऐसी चीज के लिए तीन महीने जेल में बिताने पड़े, जो वास्तव में कोई अपराध की श्रेणी में आता ही नहीं है।

विश्वविद्यालयों में आलोचनात्मक सोच और शोध का माहौल जरूरी

जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि भारत के विश्वविद्यालय ऐसे स्थान होने चाहिए जहां छात्र इन सभी संवेदनशील मुद्दों पर आलोचनात्मक सोच और शोध कर सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे मामलों में छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने से बचा जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है और गंगा नदी पर चिकन खाने से रोकने वाला कोई कानून मौजूद नहीं है। इसी वजह से युवाओं को गिरफ्तार किया गया और उन्हें तीन महीने जेल में रहना पड़ा। उन्होंने मुस्लिम छात्रों की इस तरह हुई गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना की।

नाव पर इफ्तार पार्टी और गिरफ्तारी से जुड़ा पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि वाराणसी में गंगा नदी के बीच एक नाव पर इफ्तार पार्टी करने और मांसाहार करके हड्डियां नदी में फेंकने का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में शामिल 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत बाद में आठ आरोपियों को इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी। वहीं, राहत न मिलने पर शेष बचे अन्य आरोपियों ने अपनी रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आया।

Desh Raj
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