प्रशांत महासागर के तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि, पूर्वी एशिया पर मंडराया सुपर टाइफून का खतरा

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Manila News: प्रशांत महासागर की सतह पर तापमान बढ़ने से पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया में भयंकर तूफानों की आशंका बढ़ गई है। अल नीनो के प्रभाव से भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। वैज्ञानिकों ने फिलीपींस, जापान और ताइवान जैसे तटीय क्षेत्रों में विनाशकारी सुपर टाइफून आने की चेतावनी दी है।

प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए चरम स्तर पर पहुंच गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार असामान्य रूप से तप रहा महासागर किसी ‘बुखार से पीड़ित मरीज’ जैसा व्यवहार कर रहा है। पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया के तटीय देशों—फिलीपींस, ताइवान, चीन और जापान—के लिए समुद्री तूफान कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन अल नीनो के प्रभाव से महासागर के अत्यधिक गर्म होने के कारण अब तक के सबसे खतरनाक सुपर टाइफून आने की आशंका पैदा हो गई है।

अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है और इसका सीधा प्रभाव वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण पर पड़ता है। यूके मौसम विज्ञान विभाग (UK MET Office) के अनुसार, यह आधुनिक मानव इतिहास का सबसे तीव्र और प्रभावशाली अल नीनो साबित हो सकता है, जिसके आगामी मार्च तक सक्रिय रहने के आसार हैं।

तापमान ने तोड़ा 1949 के बाद का रिकॉर्ड

फिलीपींस के राष्ट्रीय मौसम ब्यूरो की प्रमुख वैज्ञानिक एना लिजा सोलिस ने मनीला में चेतावनी दी है कि महासागर की यह अत्यधिक गर्मी विनाशकारी तूफानों को जन्म दे सकती है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। वर्ष 1949 में रिकॉर्ड रखने की शुरुआत के बाद से यह सबसे अधिक तापमान है। इससे पूर्व दिसंबर 1997 में यह रिकॉर्ड 3.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। अत्यधिक गर्म समुद्री पानी चक्रवातों और तूफानों के लिए तीव्र ईंधन का काम करता है।

तूफानों की तीव्रता में वृद्धि और बदलता मार्ग

‘एक्यूमुलेटेड साइक्लोन एनर्जी’ (ACE) इंडेक्स के अनुसार, इस वर्ष दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशिया में समुद्री तूफानों की तीव्रता पिछले 30 वर्षों के औसत से लगभग दोगुनी रहने का अनुमान है।

अल नीनो के कारण केवल तूफानों की शक्ति ही नहीं बढ़ रही, बल्कि उनके बनने का स्थान और आगे बढ़ने की दिशा भी बदल रही है। हवा के प्रारूप में आए बदलाव से तूफान अब पहले की तुलना में अधिक पूर्व दिशा में बन रहे हैं। समुद्र के गर्म पानी के ऊपर अधिक समय बिताने से उन्हें अत्यधिक ऊर्जा मिल रही है। बीते अगस्त में ‘चान होम’ नामक तूफान ने वैज्ञानिकों को तब चकित कर दिया था, जब वह दक्षिण से उत्तर की पारंपरिक दिशा के बजाय पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ते हुए पूरे जापान को पार कर गया।

वैज्ञानिक शोध में 26 प्रतिशत अधिक वर्षा का अनुमान

फिलीपींस की राजधानी मनीला की जलवायु वैज्ञानिक राफेला जेन डेलफिनो और उनकी शोध टीम द्वारा किए गए कंप्यूटर सिमुलेशन के नतीजे चिंताजनक हैं। टीम ने वर्ष 2013 में आए सुपर टाइफून ‘हाइयान’—जिसमें 6,000 से अधिक लोगों की जान गई थी—के आंकड़ों के आधार पर मॉडल तैयार किया। इस अध्ययन से संकेत मिला कि समुद्र के बढ़ते तापमान के कारण इन तूफानों में होने वाली कुल वर्षा में 26 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।

फिलीपींस में हर साल औसतन 20 तूफान आते हैं, ऐसे में यह वृद्धि गंभीर बाढ़ और विनाश का कारण बन सकती है। देश में बार-बार आने वाली बाढ़ और नियंत्रण ढांचे के बजट में अनियमितताओं को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध भी दर्ज किया गया है।

आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे पर जोर

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने सचेत किया है कि आपदा से बचाव की तैयारी के लिए सरकारों के पास समय सीमित है। यूएनडीपी के अनुसार किसी मौसमी आपदा का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित क्षेत्र की सड़कें, जल निकासी तंत्र, आवासीय इकाइयां और आपातकालीन राहत कोष कितने सुदृढ़ हैं। संगठन का मानना है कि वर्तमान संकट से निपटने के लिए मजबूत और टिकाऊ बुनियादी ढांचे का निर्माण प्राथमिकता होनी चाहिए।

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