देहरादून में लापरवाही की भेंट चढ़े ट्रांसप्लांट किए गए 972 पेड़, विशेषज्ञों ने प्रोजेक्ट को बताया असफल

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Dehradun News: देहरादून में हरियाली बचाने के सरकारी दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। सहस्रधारा रोड चौड़ीकरण के दौरान उखाड़े गए करीब 972 पेड़ों को रायपुर स्टेडियम के पास ट्रांसप्लांट किया गया था। तीन साल बीतने के बाद लापरवाही के चलते 90 फीसदी से ज्यादा पेड़ सूख चुके हैं।

रायपुर स्पोर्ट्स कॉलेज और क्रिकेट स्टेडियम के बीच का मैदान अब सूखे पेड़ों का कब्रिस्तान बन गया है। ट्रांसप्लांट किए गए अधिकांश पेड़ों के तनों में दीमक लग चुकी है। वन विभाग और पीडब्ल्यूडी ने पांच साल तक वैज्ञानिक देखभाल का वादा किया था, लेकिन शुरुआती कुछ महीनों के बाद पेड़ों को लावारिस छोड़ दिया गया।

तकनीकी खामियों और देखरेख की कमी से सूखे पेड़

दैनिक जागरण आईनेक्स्ट की पड़ताल में सामने आया कि ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों में से 10 परसेंट भी जीवित नहीं बचे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ आशीष गर्ग के मुताबिक, सहस्रधारा रोड और रायपुर के वातावरण व मिट्टी में काफी अंतर है। ट्रांसप्लांटेशन के दौरान मशीनों से पेड़ों की मुख्य जड़ों को बुरी तरह काट दिया गया था।

विशालकाय और पुराने पेड़ों का ट्रांसप्लांट सक्सेस रेट केवल 10 से 20 परसेंट ही होता है। नीम, बरगद और पीपल जैसे पेड़ 90 परसेंट तक पनप जाते हैं, जबकि यूकेलिप्टस और बबूल नहीं बच पाते। रोपाई के बाद एंटी फंगल ट्रीटमेंट, विशेष खाद और नमी नियंत्रण का अभाव होने से यह पूरा प्रोजेक्ट पूरी तरह असफल रहा।

भविष्य की परियोजनाओं के लिए जरूरी सबक

भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे और कीमाड़ी-मसूरी मार्ग जैसे आगामी प्रोजेक्ट्स के लिए रायपुर की नाकामी बड़ा सबक है। जानकारों की मांग है कि दिल्ली की तर्ज पर फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट से रायपुर साइट का सर्वाइवल ऑडिट कराया जाए। जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई हो और केवल 80 परसेंट से अधिक जीवित रहने की संभावना वाले कम उम्र पौधों को ही ट्रांसप्लांट किया जाए।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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