Shimla News: करीब 25 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद शिमला के प्रतिष्ठित होटल ‘वाइल्ड फ्लावर हॉल’ से हिमाचल प्रदेश सरकार के लिए भारी कमाई का रास्ता साफ हो गया है। होटल के संचालन और प्रबंधन के लाइसेंस अधिकारों के लिए हुई ई-नीलामी में वार्षिक सकल राजस्व का 47.1 प्रतिशत हिस्सा सरकार को देने की देश की अब तक की सबसे बड़ी रिकॉर्ड बोली लगी है।
इस रिकॉर्ड बोली के आधार पर आगामी 35 साल की लाइसेंस अवधि के दौरान प्रदेश सरकार को लगभग 2000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इस हिसाब से औसतन हर महीने तीन करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे सरकारी खजाने में आएगी। इसके अलावा, इस सौदे में 24 करोड़ रुपये की अग्रिम लाइसेंस फीस और होटल की संपत्ति में कम से कम 50 करोड़ रुपये का निवेश करने की प्रतिबद्धता भी शामिल है। समझौते के तहत लाइसेंस अवधि के दौरान सरकार को मिलने वाले राजस्व में हर साल तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान भी रखा गया है।
क्या था पूरा मामला?
ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक इमारत में संचालित होने वाला वाइल्ड फ्लावर हॉल साल 1993 में आग लगने के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद सरकार ने संपत्ति के पुनरुद्धार के लिए निजी समूहों का सहयोग लेने का निर्णय लिया। वर्ष 1995 में पांच सितारा डीलक्स होटल के निर्माण और संचालन के लिए ईआइएच (EIH) के साथ एक संयुक्त उद्यम समझौता हुआ था। हालांकि, 1998 आते-आते दोनों पक्षों में मतभेद बढ़ने लगे।
राज्य सरकार का आरोप था कि होटल को तय समयसीमा के भीतर पूरी तरह व्यावसायिक रूप से शुरू नहीं किया गया और समझौते की अन्य शर्तों का भी उल्लंघन हुआ। इसके बाद मामला कंपनी लॉ बोर्ड, मध्यस्थता ट्रिब्यूनल और विभिन्न अदालतों तक पहुंच गया। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 2024 में होटल का कब्जा वापस लेने का रास्ता साफ हुआ और अक्टूबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने ईआइएच और संबंधित पक्षों को होटल खाली करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
25 साल के विवाद के बाद मिले 400 करोड़ रुपये
लगभग ढाई दशकों तक चले इस कानूनी संघर्ष के अंत में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद होटल की संपत्ति का पूर्ण स्वामित्व और नियंत्रण प्रदेश सरकार को वापस मिल गया। इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के दौरान सरकार को मुआवजे और अन्य मदों के रूप में करीब 400 करोड़ रुपये की नकद राशि भी प्राप्त हुई है। सरकार द्वारा चुनी गई इस ई-नीलामी प्रक्रिया से स्पष्ट है कि होटल का व्यावसायिक संचालन लाइसेंसधारक द्वारा किया जाएगा, जबकि जमीन और मूल परिसंपत्तियों का संपूर्ण स्वामित्व सरकार के पास ही सुरक्षित रहेगा।